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यह तो आपको पता ही होगा कि हिंदी सिनेमा के मौजूदा दौर के सबसे बड़े स्टूडियो यश राज फिल्म्स में यश का मतलब दिग्गज निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा से है और राज लिया गया है हिंदी सिनेमा के करिश्माई सुपरस्टार राजेश खन्ना के नाम से। राजेश खन्ना ने इसी तरह निर्माता, निर्देशक शक्ति सामंत के साथ भी शक्ति राज फिल्म्स नाम की कंपनी बनाई थी। यश राज फिल्म्स की बनाई पहली फिल्म ‘दाग’ 27 अप्रैल 1973 को रिलीज हुई और इस लिहाज से इसके 50 साल पूरे होने के जश्न का दिन आ गया है। अपनी इस सुपरहिट फिल्म के बारे में फिल्म की हीरोइन शर्मिला भी काफी खुश हैं। उन्होंने फिल्म के हीरो राजेश खन्ना और निर्माता, निर्देशक यश चोपड़ा के साथ काम करने की अपनी यादें साझा की हैं।
मशहूर उपन्यासकार गुलशन नंदा की कहानी पर बनी फिल्म ‘दाग’ दरअसल टॉमस हार्डी के उपन्यास ‘मेयर ऑफ कैस्टरब्रिज’ से प्रेरित मानी जाती है। फिल्म ‘दाग’ को हिंदी सिनेमा का मील का पत्थर माने जाने में इसके संवादों का बड़ा हाथ है, जिन्हें लिखा था उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे शायर और लेखक अख्तर उल इमान ने। अख्तर उल इमान इस फिल्म के पहले तक बी आर फिल्म्स में मासिक वेतन पर लिखते थे। ‘दाग’ ने उनके करियर की रफ्तार बदल दी। यह बात सन 1970 की है कि बंबई (अब मुंबई) के हर दूसरे प्रोडक्शन हाउस में एक ही बात की चर्चा चलती रहती थी और वह ये कि बलदेव राज चोपड़ा यानी बी आर चोपड़ा के छोटे भाई ने बीआर फिल्म्स से अलग होकर अपनी खुद की कंपनी खोल ली है। यश चोपड़ा को अपनी नई कंपनी खोलने का ख्याल भी आया तो राजेश खन्ना की वजह से ही। आखिरकार, राजेश खन्ना का करियर डूबने से यश चोपड़ा ने ही तो बचाया था। यश चोपड़ा तब बीआर फिल्म्स के लिए काम किया करते थे और उधर राजेश खन्ना की शुरू की पांचों फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं। यश चोपड़ा उन दिनों फिल्म ‘आदमी और इंसान’ की शूटिंग कर रहे थे और फिल्म की शूटिंग इसकी हीरोइन सायरा बानो के बीमार पड़ने की वजह से अचानक रुक गई। करीब महीने भर का वक्ता कैसे काटा जाए तो इस दौरान यश चोपड़ा ने अपने दोस्त राजेश खन्ना को लेकर सिर्फ 28 दिन में बना डाली फिल्म ‘इत्तेफाक’। ये राजेश खन्ना के करियर की बड़ी हिट फिल्म रही है।
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‘इत्तेफाक’ की कामयाबी का एहसान राजेश खन्ना ने फिल्म ‘दाग’ से उतारा और इसके लिए नए नए निर्माता बने यश चोपड़ा की भरपूर मदद भी की। यश चोपड़ा से उनकी पटती भी खूब थी। फिल्म में हीरोइन के तौर पर आईं राजेश खन्ना की फेवरेट हीरोइन शर्मिला टैगोर और इसी फिल्म से यश चोपड़ा ने हिंदी सिनेमा को दिया चांदनी का किरदार। यश चोपड़ा की किसी भी फिल्म में चांदनी नाम का किरदार सबसे पहले करने का मौका मिला उन दिनों की उभरती अदाकारा राखी को। वहीं, राजेश खन्ना के साथ अपनी जोड़ी के बारे में बात करते हुए शर्मिला टैगोर कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि काका (राजेश खन्ना) ने फिल्म ‘दाग’ में यादगार प्रदर्शन किया। उनका मूंछों वाला डैशिंग लुक तो उन दिनों खूब मशहूर हुआ था। वह पहले से ही युवाओं के दिलों की धड़कन थे और साथ ही बहुत अच्छे इंसान भी थे। मैं वास्तव में बहुत आभारी और खुश हूं कि दर्शकों ने काका और मुझे एक साथ काम करते हुए पसंद किया और हम एक हिट जोड़ी बन गए। हमने साथ में कुछ बेहतरीन फिल्में बनाई और ‘दाग’ बेशक उनमें से एक है।’
फिल्म ‘दाग’ कहानी है सुनील, सोनिया और चांदनी की। हनीमून के दौरान सोनिया पर हमला होता है और उसे बचाने के दौरान सुनील के हाथों एक कत्ल हो जाता है। सुनील को सजा-ए-मौत होती है लेकिन जेल लौटते समय सुनील को ले जा रही पुलिस की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। माना जाता है कि वह मर गया। सोनिया मां बनती है। सुनील की यादों में जीते हुए वह स्कूल में नौकरी करती है। और, एक दिन उसे पता चलता है कि सुनील तो जिंदा है। वह चांदनी नाम की किसी रईस महिला का पति बनकर रह रहा होता है। दरअसल, चांदनी के गर्भवती होने का पता चलने पर उसका प्रेमी उसे छोड़ जाता है और इस बच्चे को पिता का नाम देने के लिए सुनील ये कदम उठाता है। भलमनसाहत में उठाए गए इन कदमों के निशान नापते कानून फिर एक बार सुनील के दरवाजे पहुंचता है।
फिल्म ‘दाग’ के 50 साल पूरे होने के मौके पर फिल्म के निर्माता, निर्देशक यश चोपड़ा के बारे में अभिनेत्री शर्मिला टैगोर कहती हैं, ‘यश के साथ काम करना अद्भुत अनुभव रहा। मैंने उनके साथ फिल्म ‘वक्त’ में भी काम किया था। वह हमेशा मस्ती करते थे। एक निर्देशक के रूप में उन्होंने सेट पर हमेशा सभी को उत्साहित किया। उनके साथ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति से पूछिए, अपने पंजाबी प्रेम और सादगी से वह सबका दिल जीत लेते थे।’ फिल्म की शूटिंग के बारे में पूछे जाने पर शर्मिला कहती हैं, ‘एक दिन हम शिमला में शूटिंग कर रहे थे और मेरी नींद खुली तो मुझे बर्फ से ढका हुआ माहौल दिखा। होटल की खिड़की से देखने में ये एक आश्चर्यजनक दृश्य था। लेकिन इसका यह भी मतलब था कि मुझे काम पर जाने के लिए चलकर जाना होगा क्योंकि कोई कार बर्फ से ढकी सड़क से होकर हमारे पास नहीं आ सकती थी। मैं हेयर और मेकअप के बाद तैयार हुई और बमुश्किल पांच कदम ही चली थी कि लड़कियों के एक झुंड ने मुझ पर बर्फ के गोले फेंकने शुरू कर दिए। मैं मना करने के लिए मुड़ी तो उन्होंने कि ये तो हमारा खेल है, हम तो खेलेंगे। फिर मैंने भी इसका मजा लेना शुरू कर दिया। बस इसके बाद हुआ ये कि मुझे लोकेशन पर पहुंचकर सबसे पहले अपनी साड़ी बदलनी पड़ी क्योंकि मैं पूरी तरह भीग गई थी। यश ने इसके लिए वहां एक अस्थायी कमरे का प्रबंध कर दिया था।’
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