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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हमारे सौर मंडल में अब सबसे ज्यादा चंद्रमा शनि ग्रह के पास हो गए हैं, उसके 62 नये चंद्रमा अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान संगठन ने स्वीकार कर लिए हैं। इन्हें मिला उसके पास अब कुल 145 चंद्रमा हैं, जो बृहस्पति ग्रह के 95 चंद्रमा से कहीं अधिक है।
खास बात है कि हाल ही में सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के 12 नये चंद्रमा मिलने पर उसे हमारे सौर मंडल में सबसे ज्यादा चंद्रमाओं वाला ग्रह घोषित किया गया था। महज तीन महीने में उससे यह उपाधि छिन गई।
छल्लों वाले ग्रह के रूप में मशहूर शनि के नये 62 चंद्रमाओं की खोज खगोल वैज्ञानिकों के दो समूहों ने की थी। इनमें शामिल खगोल विज्ञानी स्कॉट शेफर्ड के अनुसार दोनों ग्रहों के बार ढेरों चंद्रमा हैं, लेकिन शनि ने इस बार बाजी मार ली है। दूसरे समूह का नेतृत्व ताइवान के वैज्ञानिक एडवर्ड एश्टन कर रहे थे। नये चंद्रमाओं का आकार महज एक से दो मील है, दिखने में भी वे आलू जैसे अनियमित-गोलाकार हैं। वे शनि ग्रह से 60 लाख से 1.8 करोड़ किमी दूर कक्षा में रहते हुए उसकी परिक्रमाएं कर रहे हैं। वैसे शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा टाइटन है, जो करीब 10 लाख किमी की दूरी पर परिक्रमा करता है।
इसलिए खास हैं ये नन्हे चंद्रमा
शनि के नन्हे चंद्रमा समूहों में रहते हैं। शुरुआती आकलन है कि वे 150 मील आकार के बड़े चंद्रमाओं से टूट कर बने हैं। इसी वजह से नन्हे चंद्रमा हमारे सौर मंडल की निर्माण प्रक्रिया समझने की रोचक कड़ी कहे जा रहे हैं।
नासा वैज्ञानिक बोनी बुराटी के अनुसार इन्हें किसी अपराध की जांच में अंगुलियों के निशानों की तरह महत्वपूर्ण समझिए। निर्माण के समय सौर-मंडल कितना अशांत था? कैसे टकराव हो रहे थे? सूर्य की परिक्रमा के लिए ग्रह एक दूसरे से कैसे धक्का-मुक्की कर रहे थे? आदि अनुमान लगाने में इनसे मदद मिलती है। कुछ वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले समय में हमें कई और चंद्रमाओं का पता चल सकता है, इनकी संख्या शायद हजारों में भी हो सकती है।
डॉ. शेफर्ड के अनुसार, हर ऐसा पिंड जो किसी ग्रह की एक निश्चित कक्षा में रहते हुए परिक्रमा करता है, वह उस ग्रह का चंद्रमा कहलाता है। इनके न्यूनतम आकार की खगोल विज्ञान ने अब तक परिभाषा तय नहीं है।
इन्सानों के रहने लायक और दो ग्रहों की खोज
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इन्सानों के रहने लायक दो और ग्रहों की खोज की है। टीओआई-2095बी और टीओआई-2095सी नामक दोनों ग्रह पृथ्वी से आकार में अधिक बड़े और वजनी है।
दोनों ग्रहों की सतह का तापमान 24 से 74 डिग्री सेल्सियस के बीच है। नासा के मुताबिक, यह ग्रह अपने तारे से अच्छी दूरी पर रह रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि यह ग्रह इन्सानी बस्ती बसाने के लायक हो सकते हैं। ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट से ये दोनों सूर्य की तरह लाल नजर आ रहे थे। टीओआई-2095 ब्रह्मांड के सबसे बड़े तारों के समूह से संबंध रखता है।
यह हमारे सूर्य की तुलना में कम गर्म है। लेकिन इसकी रेडिएशन, अल्ट्रावायलेट और एक्स-रे तरंगें निकाल रहा है। टीओआई-2095 से निकल रही रेडिएशन से पास मौजूद ग्रहों का वायुमंडल खत्म हो सकता है। लेकिन हम जिन दो ग्रहों की बात कर रहे हैं, वो इतनी अच्छी दूरी पर हैं कि उनका वायुमंडल बना हुआ है।
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