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जंतर मंतर से हरिद्वार। वहां से सोरम (मुजफ्फरनगर)। खाप पंचायतों द्वारा 9 जून को दोबारा से जंतर मंतर पर जाने का एलान। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पहलवानों की सीक्रेट मीटिंग, उसके बाद पहलवानों का अपनी ड्यूटी पर पहुंचना और राकेश टिकैत का यह कहना कि अब 9 जून को जंतर मंतर पर नहीं जाएंगे, अभी तक पहलवानों के आंदोलन की कुछ यही कहानी है। हालांकि यहां तक पहुंची इस कहानी में कोई एक-दो नहीं, बल्कि अलग-अलग कई किरदार हैं।
हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात तक के लोग, पहलवानों के मामले में अहम कड़ी बने हैं। इस मामले को शांत करने में केंद्रीय मंत्रियों से लेकर राज्यसभा सांसद और राज्यपाल से विधायक तक, पर्दे के पीछे कई खास चेहरे शामिल रहे हैं। यहां तक कि पहलवानों के आंदोलन को हाईजैक करने को लेकर एक समय पर खाप पंचायतों के बीच भी मनमुटाव देखा गया। एक ऐसी घड़ी भी आई, जब खाप पंचायतों ने पहलवानों को उनके सामाजिक बहिष्कार की चेतावनी दे दी थी।
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