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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला
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शाहबाद में किसानों के हाइवे पर एकत्रित होने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार ने कहा कि नेशनल हाइवे देश की लाइफ लाइन हैं और इसे किसी भी हालत में बाधित न होने दिया जाए। सरकार सुनिश्चित करे कि इस पर न तो यातायात बाधित हो और न ही जनता को असुविधा हो। हालांकि ऐसा करते हुए प्रशासन अत्यधिक संयम बरते और बल प्रयोग अंतिम उपाय के रूप में ही इस्तेमाल हो। कोर्ट ने इस बारे में मुख्य सचिव को रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश भी दिया है।
किसान सूरजमुखी के बीज की खरीद न करने और फसल को भावांतर भरपाई योजना के तहत शामिल करने के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर नेशनल हाइवे 44 पर जमे हैं। किसानों के हाइवे पर एकत्रित होने के चलते इसके बाधित होने से क्षेत्र पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव को देखते हुए मंगलवार को अर्जी दाखिल करते हुए इस मामले में तुरंत सुनवाई की मांग की गई।
कोर्ट को बताया गया कि किसान नेताओं के आह्वान पर किसान हाइवे पर पहुंच रहे हैं और अगर अभी स्थिति पर काबू न पाया गया तो हाइवे जाम कर दिया जाएगा। किसानों के एकत्रित होने से ट्रैफिक जाम शाहाबाद से दोनों ओर तेजी से बढ़ता जा रहा है जिसे जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
यह राष्ट्रीय राजमार्ग न केवल हरियाणा बल्कि पंजाब, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल और यूटी चंडीगढ़ के साथ राष्ट्रीय राजधानी को जोड़ता है। कोर्ट में यह तर्क दिया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग को आंदोलनकारियों द्वारा अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है। पिछले सात सितंबर माह में भी यहां पर राजमार्ग अवरोध किया गया था और याची ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जो अभी भी विचाराधीन है। उस समय हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया था कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 को बिना किसी बाधा के यातायात और आवाजाही के लिए खुला रखा जाए ताकि जनता को असुविधा न हो।
हाईकोर्ट ने कहा कि जहां एक ओर हाइवे पर ट्रैफिक बाधित न होने देना सरकार का काम है, वहीं इस मामले में किसानों के साथ शांति से विवाद का हल निकालना भी जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सरकार व किसान संगठन दोनों को संयम से काम लेना चाहिए ताकि देश का आम नागरिक प्रभावित न हो।
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