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Mukhtar Ansari
– फोटो : अमर उजाला
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पूर्वांचल दहशत का पर्याय बन चुके माफिया मुख्तार अंसारी के फैलते साम्राज्य को हर बार बनारस से मात मिली है। जरायम की दुनिया से लेकर सियासी सफर में उसे काशी की धरती ने कभी स्वीकार नहीं किया। अपराध की दुनिया में उसे माफिया ब्रिजेश सिंह गैंग ने कड़ी टक्कर दी और उसे बनारस में पैर नहीं जमाने दिया।
इसके बाद उसने 2009 में राजनीतिक गलियारे के जरिये बनारस में एंट्री का प्रयास किया था, मगर उसे यहां मुंह की खानी पड़ी थी। 32 साल पहले व्यापारी नेता अवधेश राय की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद अब माफिया का खौफ फिर से मिट्टी में मिल गया है।
मुख्तार अंसारी ने बनारस में रंगदारी और अपरहण के अपने अवैध धंधे को पनपाने का प्रयास किया। बनारस में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए ही उसने अवधेश राय की दिनदहाड़े हत्या को अंजाम दिया। इस घटना के बाद अवधेश राय के छोटे भाई और कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष अजय राय ने भी सियासत का रास्ता चुना और भाजपा में सक्रिय हुए।
इस बीच मुख्तार बनारस में अपने पांव पसारने में जुटा, मगर 1996 में अजय राय भाजपा के टिकट पर कोलसला (वर्तमान में पिंडरा) से विधायक बने और उन्होंने मुख्तार से सीधा मुकाबला शुरू किया। इस बीच जरायम की दुनिया में मुख्तार अंसारी के धूर विरोधी ब्रिजेश सिंह गैंग ने भी उसके खिलाफ मोर्चाबंदी शुरू की। इससे मुख्तार अंसारी के पांव बनारस में कमजोर हुआ।
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