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Haryana
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
हरियाणा में लोकसभा चुनाव को लेकर विभिन्न दलों और नेताओं के बीच ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ शुरू हो गई है। भाजपा सरकार में शामिल जननायक जनता पार्टी (जजपा) भी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी सक्रियता बढ़ा रही है। जजपा नेता चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव में भाजपा उन्हें कम से कम तीन सीटें दे। दूसरी तरफ भाजपा का शीर्ष नेतृत्व, प्रदेश की सभी दस लोकसभा सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ने का इच्छुक है। लोकसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका, तो बात अब हरियाणा सरकार पर आ गई। दोनों दलों के बीच हुए गठबंधन में दरार की चर्चा होने लगी। जजपा और कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही भाजपा सरकार ने अब पूरी तरह से निर्दलीय विधायकों को साधना शुरू कर दिया। ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ में कुलदीप बिश्नोई और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह भी शामिल हो गए हैं। राजनीतिक जानकारों ने संभावना जताई है कि लोकसभा चुनाव के निकट प्रदेश के कई धुर विरोधी चेहरे ‘चौधर’ की खातिर हाथ मिला सकते हैं।
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वे दो बयान, जिन्होंने ‘दरार’ को किया पुख्ता
हरियाणा में लोकसभा की सभी दस सीटों पर भाजपा सांसद हैं। 90 सदस्यीय विधानसभा के गणित में भाजपा के पास 41 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 31 एमएलए हैं। जजपा के 10 विधायक हैं। इनेलो और हलोपा का भी एक-एक विधायक है। निर्दलीय विधायकों की संख्या 7 है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश की राजनीति में नेताओं की जो बयानबाजी देखने को मिली है, उससे भाजपा और जजपा गठबंधन में बड़ी दरार आने के संकेत दिख रहे हैं। उचाना कलां से जजपा विधायक और प्रदेश के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने पिछले दिनों कहा था, 3-3 लोगों के पेट में दर्द था, लेकिन इसके बाद भी वह उचाना से ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। चौटाला ने यह बात इसलिए कही, क्योंकि हरियाणा के भाजपा प्रभारी बिप्लब देब ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को उचाना कलां का अगला विधायक बताया था। चौटाला के बयान पर बिप्लब देब ने पलटवार करते हुए कहा, न तो मेरे पेट में दर्द है और न ही मैं डॉक्टर हूं। मेरा काम भाजपा संगठन को मजबूत करना है। अगर जजपा ने हमारी सरकार को समर्थन दिया है तो कोई अहसान नहीं किया। इसके बदले में उन्हें मंत्रिपद दिए गए हैं।
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