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आदिपुरुष
– फोटो : AMAR UJALA
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हाल ही में रिलीज फिल्म आदिपुरुष में श्रीराम की कथा को बदलकर निम्नस्तरीय दिखाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुधवार को तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि देश के लोग सहिष्णु हैं, तो क्या बार-बार सहिष्णुता की परीक्षा ली जाएगी। पीठ ने फिल्म के संवाद लेखक मनोज मुंतशिर को पक्षकार बनाने की अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान व न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की अवकाशकालीन खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा, अगर इस पर भी हम आंखें बंद कर लें, क्योंकि कहा जाता है कि इस धर्म के लोग बड़े सहिष्णु हैं, तो क्या इसकी परीक्षा ली जाएगी? पीठ ने कहा कि जिस रामायण के किरदारों की पूजा की जाती है, उसे एक मजाक की तरह कैसे दिखाया गया। ऐसी फिल्म को सेंसर बोर्ड ने कैसी मंजूरी दे दी। यह बहुत बड़ी गलती है। फिल्म निर्माताओं को सिर्फ पैसे कमाने हैं।
पीठ ने कहा, अगर कोई नरम है तो क्या उसे दबाया जाएगा? अच्छा है कि यह ऐसे धर्म के बारे में है, जिसके अनुयायियों ने कानून-व्यवस्था के लिए समस्या खड़ी नहीं की। हमें इसके लिए शुक्रगुजार होना चाहिए। हमने खबरों में देखा है कि कुछ लोग फिल्म देखने गए और वहां उन्होंने सिर्फ सिनेमा हॉल को बंद कराया। वे और भी ज्यादा कर सकते थे।
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