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महाराष्ट्र की सियासी उठा-पटक ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्षी दलों की ‘एकता’ को किसी की नजर लग गई है। ऐसी संभावना बताई जा रही है कि महाराष्ट्र के बाद ‘ऑपरेशन लोटस’ की अगली कड़ी में ‘बिहार’ का नंबर आ सकता है। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने तो इशारा कर दिया है कि ‘महाराष्ट्र’ का दोहराव, ‘बिहार’ में भी संभव है। यही वजह है कि सीएम नीतीश कुमार, जेडीयू विधायकों से अलग-अलग (वन-टू-वन) बात कर रहे हैं। एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने भी कह दिया है, जेडीयू विधायक कई लोगों के संपर्क में हैं। विपक्षी नेताओं की इस भगदड़ के बीच ‘ईडी’ फिर से चर्चा में आ गई है। अधिकांश विपक्षी दलों के बयान, इस ओर संकेत कर रहे हैं कि जांच एजेंसी की मदद से चुनी हुई सरकारों को गिराया जा रहा है। गिरफ्तारी का भय दिखाकर नेताओं को भाजपा का समर्थन करने या उसमें शामिल होने का दबाव डाला जा रहा है।
महाराष्ट्र के लिए विपक्षी दलों की एकता बैठक जिम्मेदार
महाराष्ट्र में एनसीपी नेता अजित पवार, रविवार को भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की सरकार में डिप्टी सीएम बन गए हैं। अजित ने दावा किया है कि एनसीपी के अधिकांश विधायक हमारे साथ हैं। सोमवार को पार्टी प्रमुख शरद पवार ने कहा, वे दोबारा से पार्टी खड़ी करेंगे। महाराष्ट्र का घटनाक्रम अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बिहार से कुछ वैसी ही आवाज उठने लगी। भाजपा सांसद एवं बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने तो साफतौर पर कह दिया कि शरद पवार की पार्टी ‘एनसीपी’ में जो विद्रोह हुआ है, उसके लिए गत दिनों पटना में हुई विपक्षी दलों की एकता बैठक जिम्मेदार है। विपक्ष, 2024 में राहुल गांधी को प्रोजेक्ट करने की जमीन तैयार कर रहा है। बिहार में भी महाराष्ट्र जैसी स्थिति बन सकती है। मोदी ने कहा, बिहार में जदयू के विधायक और सांसद, राहुल गांधी को स्वीकार नहीं करेंगे। उनके लिए तेजस्वी यादव भी मायने नहीं रखते। जदयू में इस वक्त भगदड़ का माहौल बन गया है। सुशील मोदी की बात को एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने आगे बढ़ा दिया। उन्होंने कहा, जेडीयू में टूट की संभावना है। इस मामले में जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, केंद्र की भाजपा सरकार, जांच एजेंसियों के सहारे विपक्ष पर वार कर रही है। ये सब भाजपा की बौखलाहट है। विपक्षी गोलबंदी का असर है।
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