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अभिनेता साहिल खट्टर यूट्यूबर, टेलीविजन होस्ट और अभिनेता है। एक लंबे संघर्ष के बाद उन्हें कामयाबी मिली है। साहिल खट्टर के मुताबिक संघर्ष ऐसा रहा है कि एक्टिंग की सीख के साथ साथ जिंदगी भर की सीख दे गया। आज फेल होने से डर नहीं लगता। साहिल खट्टर की जियो सिनेमा पर 25 अगस्त से वेब सीरीज ‘बजाओ’ स्ट्रीम होने जा रही है। हाल ही में साहिल खट्टर ने अमर उजाला से खास बातचीत की।
स्पोर्ट्स से हिंदी सिनेमा की तरफ का झुकाव कैसे हुआ?
स्कूल और कॉलेज में नाटकों में भाग तो लेता रहा, लेकिन उस समय ऐसा कोई विचार नहीं था कि आगे एक्टिंग में करियर बनाना है। रोलर हॉकी मैं राज्य स्तर और टीम इंडिया के लिए खेल चुका था। और, मुझे टीम इंडिया के लिए कांस्य पदक भी मिला। जब मैं चंडीगढ़ में रेडियो ज्वाइन किया और आरजे बना तब मुझे समझ में आया कि मेरे अंदर मनोरंजन की काबिलियत है। और, इसे आगे बढ़ना चाहिए।
रेडियो जॉकी बनने की क्या कहानी है?
चंडीगढ़ में रेडियो जॉकी के लिए ऑडिशन दिया और सिलेक्ट हो गया। इंटरव्यू के दौरान वहां बहुत प्यारी बात हुई। इंटरव्यू में पूछा गया कि अपना बायोडाटा क्यों नहीं लेकर आए? मैंने कहा कि मेरे पास दो चॉइस थे। पहला या तो बायोडाटा लेकर आऊं या फिर समय पर आऊं। उन्होंने जब घड़ी देखी तो 11.30 बजे हुए थे। मैंने समय पर पहुंचना चुना। उस समय 18 साल का रहा होगा। उन्होंने उस उम्र में समय की पाबंदी और समझदारी देखकर मुझे नौकरी दे दी। तीन साल तक जॉब किया। उसके बाद मुंबई आ गया।
मुंबई आने के बाद के दिन कैसे रहे?
वह संघर्ष तो ऐसा रहा कि न सिर्फ एक्टिंग प्रोफेशन में, बल्कि जिंदगी भर का सीख दे गया। आज भी मैं फेल होने से नहीं डरता हूं। अगर मैं संघर्ष के दिनों में खुद को आर्थिक और मानसिक स्थिति में संभाल पाया, तो आज मेरे लिए कोई मुश्किल ही नहीं है। मुंबई आने के बाद मैं शुरुआती दौर में चाल में रहा। मैं पैदल ही चलता था, ताकि उससे जो पैसे बचे उससे खाना खा सकूं। मेरी संवेदनाएं हर उस इंसान के साथ है जो मेहनत करके आगे बढ़ना चाहता है।
और, करियर का टर्निंग प्वाइंट रही कबीर खान की फिल्म ’83’…
फिल्मों में आने से काफी समय पहले यूट्यूबर के रूप में मेरी शुरुआत हो गई थी। यूट्यूब की वजह से ही मुझे कबीर खान की फिल्म ’83’ मिली। उसमे सैयद किरमानी का किरदार निभाया था। मैं कबीर खान का बहुत शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मुझे हिंदी सिनेमा में करियर शुरू करने का मौका दिया। उनका तहे दिल से पूरी जिंदगी भर आभारी रहूंगा। उनकी वजह से जिंदगी में एक दिशा निर्देश मिला है।
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