[ad_1]

CRPF
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीआरपीएफ’ में एक तरफ आत्महत्या की घटनाएं कम नहीं हो पा रही हैं, तो वहीं दूसरी तरफ जवान ही नहीं, बल्कि अफसर भी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। ताजा मामला जम्मू कश्मीर में तैनात सीआरपीएफ की 14वीं बटालियन का है। यहां पर 55 वर्षीय एक डिप्टी कमांडेंट ने अपने कमांडेंट और उनके सहयोगियों पर ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। बल की 33 साल से सेवा कर रहे शिकायतकर्ता डिप्टी कमांडेंट ने इस बाबत केंद्रीय गृह सचिव, सीआरपीएफ डीजी, स्पेशल डीजी और आईजी सहित कई अधिकारियों को उक्त मामले से अवगत कराया है। डिप्टी कमांडेंट का आरोप है कि उनका लगातार उत्पीड़न हो रहा है। उन्हें इस अपमान से मुक्ति दिलाई जाए।
गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाई तो उत्पीड़न
डिप्टी कमांडेंट को उनकी 33 वर्ष की सेवा के दौरान ईमानदारी, निष्ठा और परिश्रम के लिए जाना जाता है। वे कई बड़े अफसरों के साथ काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने सीआरपीएफ हेडक्वार्टर में भी काम किया है। अब डिप्टी कमांडेंट को अत्यधिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है। अपने शीर्ष अफसरों को भेजी शिकायत में कमांडेंट, 2आईसी, एसी, एमओ/एसी, इंस्पेक्टर और कई अन्य का नाम लिखा है। डिप्टी कमांडेंट ने शीर्ष अफसरों को लिखा है कि जब उन्होंने सीओ के भ्रष्टाचार और दूसरे गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाई, तो उनका उत्पीड़न किया जाने लगा। उन्होंने उक्त अफसरों पर विभिन्न अवैध तरीकों से पैसा बनाने का कथित आरोप लगाया है।
केरोसिन व घातक तंबाकू को लेकर आरोप
भ्रष्टाचार के मामलों में केरोसिन (अत्यधिक ठंड में जवानों की जीवन रेखा) की सर्दियों के मौसम में 35 लाख या उससे अधिक की अवैध बिक्री, यूनिट की कैंटीन में कई अनाधिकृत वस्तुएं (घातक तंबाकू उत्पादों सहित) जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है, बताई गई हैं। यहां पर भ्रष्टाचार का पैसा अधिकारी के पास जा रहा है। आरोपी अधिकारी के जीसी पिंजौर स्थित आवास पर बल की जवानों द्वारा बेगार कराई जा रही है। जनशक्ति के दुरुपयोग का आरोप लगा है। एसएम के माध्यम से मसालों में कटौती हो रही है। निर्धारित खरीद प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है। एमओ/एसी की सहायता से दवाओं/सीएपी वस्तुओं में कटौती की बात कही गई है। एयर कोरियर सर्विस ‘एसीएस’ में सीटों के आवंटन में पक्षपात का आरोप लगा है। कई लोगों के अधिकार छीन लिए गए हैं। अनुशासनहीन अधिकारियों का जबरदस्त समर्थन किया गया। वजह, ये लोग भी उच्च अधिकारी की मदद कर रहे थे। एक ही वस्तु की कथित तौर पर दोबारा से खरीद दिखा दी गई। उन अफसरों का जवानों के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है। हार्ड ड्यूटी पर तैनात जवानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
[ad_2]
Source link