[ad_1]

MP Election: BSP
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
जैसे-जैसे लोकसभा के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे ही अगले कुछ दिनों में होने वाले विधानसभा के चुनावों के माध्यम से सभी सियासी कील कांटे भी दुरुस्त किए जा रहे हैं। इस कड़ी में बहुजन समाज पार्टी भी अपनी सक्रियता के चलते एमपी में कांग्रेस के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। सियासी जानकारों का कहना है कि अगर मध्यप्रदेश के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की सक्रियता से यहां के परिणामों पर थोड़ा बहुत भी असर पड़ता है, तो INDIA गठबंधन को लेकर नए-नए सियासी समीकरण बन सकते हैं, जिसमें बहुजन समाज पार्टी की भी अहम भागीदारी हो सकती है। इन सब के बीच बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती नवंबर के पहले सप्ताह से मध्यप्रदेश में बड़ी रैलियों के माध्यम से सियासी समीकरणों को दुरुस्त करने में लगने वाली हैं।
सियासी जानकारों का कहना है कि मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच तो सीधे तौर पर लड़ाई है ही, लेकिन तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बीएसपी भी इस चुनाव में मौके का फायदा उठाने की जुगत में लगी हुई है। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार अमित आनंद कहते हैं कि जिस तरीके से मध्यप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी को लेकर सियासी चर्चाएं हो रही हैं, उसमें अभी भी बहुजन समाज पार्टी पिछले चुनावों के आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस और भाजपा के बाद तीसरे नंबर की पार्टी है। वह कहते हैं कि पिछले चुनावों में बहुजन समाज पार्टी तकरीबन 68 सीटों पर दूसरे या तीसरे नंबर पर रही थी। यही वजह है कि बसपा इन चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगाकर इन 68 सीटों के साथ-साथ अन्य अपने प्रभाव वाली सीटों पर चुनावी परिणाम को बदलने की तैयारी में मजबूती से लगी हुई है। बहुजन समाज पार्टी ने इन सभी सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ने के लिए मायावती के चुनावी दौरे भी लगाने शुरू कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषक अमित आनंद कहते हैं कि बहुजन समाज पार्टी अगर इस विधानसभा के चुनाव में पिछले विधानसभा चुनाव के परिणामों की तुलना में अच्छा करती है, तो इसका सीधा असर INDIA गठबंधन की रिस्ट्रक्चरिंग पर भी हो सकता है। उनका कहना है की मध्यप्रदेश में बसपा के परिणाम या वोट प्रतिशत उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के रिश्तों में बैलेंस का पैमाना भी तय करेंगे। क्योंकि इस वक्त मध्यप्रदेश की सियासत में जिस तरीके से समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के ऊपर दबाव डालकर ज्यादा से ज्यादा सीटें छोड़ने की रणनीति बनाई थी, फिलहाल उसमें समाजवादी पार्टी को कोई फायदा तो नहीं हुआ है। बल्कि दोनों पार्टियों के बीच में अंदरूनी तौर पर थोड़े रिश्ते भी तल्ख हो गए हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि क्योंकि INDIA गठबंधन में समाजवादी पार्टी शामिल है, इसलिए अखिलेश यादव ने मध्यप्रदेश में अपने लिए सीटें मांगी थीं। लेकिन हकीकत यह है कि मध्यप्रदेश में समाजवादी पार्टी से कहीं ज्यादा सियासी रूप से बहुजन समाज पार्टी न सिर्फ सक्रिय है, बल्कि वोट बैंक के मामले में भी समाजवादी पार्टी से कई गुना ज्यादा है। ऐसी दशा में कांग्रेस को सीधा खतरा समाजवादी पार्टी के मध्यप्रदेश में चुनाव लड़ने से कम जबकि बसपा के ज्यादा सक्रिय होने से अधिक बना हुआ है।
[ad_2]
Source link