Home World War Zone में 18 दिन कैसे बीते? ग्राउंड जीरो से Zee News की जुबानी, इजरायल-हमास जंग की कहानी

War Zone में 18 दिन कैसे बीते? ग्राउंड जीरो से Zee News की जुबानी, इजरायल-हमास जंग की कहानी

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War Zone में 18 दिन कैसे बीते? ग्राउंड जीरो से Zee News की जुबानी, इजरायल-हमास जंग की कहानी

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Israel-Hamas War: नमस्कार दोस्तों, मैं विशाल पाण्डेय हूं. इजरायल-हमास के बीच भीषण युद्ध जारी है. ये युद्ध कब तक चलेगा, इसका जवाब शायद ही किसी के पास हो. लेकिन आज मैं आपको सीधे युद्ध के मैदान से आंखों देखी बताऊंगा, जो मैंने बीते 18 दिनों में देखा और महसूस किया, उसे शब्दों में पिरोने का प्रयास करूंगा. मेरे लिए वॉर जोन के दर्द और तस्वीरों को शब्दों में बयां करने थोड़ा मुश्किल है लेकिन फिर भी मैं आप तक प्रथम दृष्टया वृंतात बता रहा हूं. इस यात्रा में मेरे साथ कैमरा सहयोगी एस जयदीप लगातार डटे रहे.

इजरायल में 26/11 जैसा आतंकी हमला

तारीख 7 अक्टूबर, 2023, मैं सुबह अपने घर पर था और शाम 5 बजे के लिए ताल ठोक के डिबेट की तैयारी कर रहा था कि आज किन मुद्दों पर बहस की जा सकती है. इसी बीच, मेरे मोबाइल पर किसी ने सूचना भेजी कि इजरायल पर बड़ा आतंकी हमला हुआ है. इसकी डिटेल और चेक कर लीजिए क्योंकि ये बहुत बड़ा हमला है. इस मैसेज को पढ़ते ही मैंने इजरायली न्यूज़ चैनल्स और अखबारों की खबरों को ऑनलाइन पढ़ने का प्रयास किया. मैंने देखा कि इजरायल में हमास ने आतंकी हमला किया. कुछ लोगों से खबर की पुष्टि करने के बाद Zee News पर इस आतंकी हमले की खबर को ब्रेक किया और हम इस खबर पर बने रहे. धीरे-धीरे जब और ज्यादा तस्वीरें और खबरें इजरायल से आने लगी तो यह साफ होने लगा कि इजरायल पर यह 26/11 मुंबई जैसा आतंकी हमला हुआ है.

बेगुनाहों को गोलियों से भून डाला

मैं दोपहर 12 बजे तक ऑफिस पहुंचा और Zee News इस खबर पर लगातार बना रहा. इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऐलान कर दिया कि इजरायल युद्ध में है. इजरायल, हमास के इस आतंकी हमले का बदला लेगा. लेकिन इसी बीच इजरायल में हमास के आतंकवादी निर्दोष लोगों को गोलियों से मार रहे थे और दक्षिणी इजरायल में रॉकेट से हमला कर लोगों को निशाना बना रहे थे. गाजा पट्टी से सटे हुए इजरायल के बहुत से लोगों को हमास के आतंकियों ने किडनैप भी कर लिया था. यह खबर बहुत ज्यादा बड़ी हो गई थी क्योंकि पूरी दुनिया की नजर इजरायल के इस आतंकी हमले पर थी.fallback

इजरायल जाने की तैयारी

दोपहर 1 बजे के आसपास ऑफिस से मुझे फोन पर कहा गया कि विशाल इजरायल के लिए वीजा का आवेदन कर दो, जितनी जल्दी वीजा मिले और इजरायल जाने की तैयारी करिए. शाम 5 बजे ताल ठोक के डिबेट के दौरान मैं LIVE था और खबर आई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल पर हुए आतंकी हमले पर दुख व्यक्त किया और कहा कि भारत इस संकट की घड़ी में इजरायल के साथ खड़ा है. पहली बार भारत की तरफ से इजरायल के मुद्दे पर इतना बड़ा स्टैंड लिया गया था.

ज़ी न्यूज़ की टीम कैसे पहुंचीं इजरायल?

जैसे ही शाम 6 बजे डिबेट खत्म हुई तो मैंने वीजा की प्रकिया शुरू कर दी. मुझे अगले दिन सुबह 9 बजे इजरायल दूतावास में सभी जरूरी कागजात के साथ बुलाया गया. देर रात 12 बजे तक हम सभी डॉक्यूमेंट इकट्ठा करते रहे. लेकिन इसी बीच एक चुनौती यह थी कि अगर वीजा मिल जाता है तो 8 अक्टूबर को इजरायल के लिए किस फ्लाइट से रवाना होंगे? हमारे पास बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट उस वक्त मौजूद नहीं था. युद्ध के मैदान में बिना बुलेट प्रूफ जैकेट और हेलमेट के जाना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं होता है. मैंने अपने एक मित्र को फोन किया और उन्होंने अपने एक बहुत मजबूत सूत्र से मेरे लिए रातों रात 2 बुलेट प्रूफ जैकेट की व्यवस्था कराई. हालांकि, इजरायल जाने का टिकट हम अभी तक बुक नहीं कर पाए थे क्योंकि ये नहीं पता था कि वीजा कब तक मिल जाएगा.

तेल अवीव पहुंचकर क्या देखा?

8 अक्टूबर की सुबह 9 बजे मैं अपने कैमरामैन एस जयदीप के साथ दिल्ली में इजरायल दूतावास पहुंच गया. हम पूरी तैयारी के साथ दूतावास पहुंचे थे ताकि अगर हमें वीजा मिले तो हम तुरंत इजरायल के लिए रवाना हो सकें. हमें दोपहर 12 बजे तक इजरायल का वीजा मिल गया. दिल्ली से तेल अवीव के लिए अगली फ्लाइट Emirates की शाम 4:15 बजे की थी. हमारे पास अभी तक टिकट नहीं था. फिर मैंने ऑफिस में बताया कि वीजा मिल गया है लेकिन अभी टिकट नहीं है. उन्होंने कहा कि अगली फ्लाइट पकड़ने का प्रयास करो. मैंने कुछ लोगों को फोन किया और किसी तरह शाम 4:15 की फ्लाइट बुक करा ली. दिल्ली से तेल अवीव के लिए हम रवाना हो गए और रात 10 बजे तेल अवीव के Ben Gurion International एयरपोर्ट पर हमारी फ्लाइट लैंड कर गई.

जब War Zone में पहुंचा ज़ी न्यूज़

मैं अपने कैमरामैन एस जयदीप के साथ जैसे ही फ्लाइट से बाहर निकला तो मुझे जगह-जगह शेल्टर के साइन बोर्ड दिखाई दिए. तेल अवीव पर एयरपोर्ट पर हर 100 मीटर पर Shelter बनाए गए हैं. क्योंकि हमास के आतंकी तेल अवीव एयरपोर्ट को भी निशाना बनाने का प्रयास कर रहे थे. जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा कर हम जैसे ही एयरपोर्ट से बाहर आए तो हमने युद्ध के क्षेत्र को पहली बार महसूस किया. Air Siren बजने लगा यानी रॉकेट से हमला होने वाला है और हमें तुरंत शेल्टर की तरफ भागना है. कई लोग शेल्टर तक पहुंच पाए और कई लोग जहां थे वहीं पर नीचे लेट गए. हम भी जमीन पर नीचे लेट गए. थोड़ी देर में सायरन की आवाज बंद हुई तो फिर टैक्सी लेकर होटल के लिए रवाना हुए.

अभी भी इजरायल में छिपे थे आतंकी

रास्ते भर मैंने इजरायल के आम लोगों के चेहरों पर डर देखा. एयरपोर्ट से तेल अवीव सिटी सेंटर तक का रास्ता पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका था. थोड़ी-थोड़ी दूर पर चेक प्वाइंट लगा पुलिस हर गाड़ी की तलाशी ले रही थी, क्योंकि हमास के आतंकियों के अभी भी इजरायल में छिपे होने की खबर थी. हमारी गाड़ी की भी तलाशी ली गई और पुलिस ने India सुनकर पासपोर्ट देखा और फिर जाने दिया. इस दौरान मैं इतना व्यस्त रहा कि ऑफिस में फोन कर नहीं बता पाया कि हम तेल अवीव पहुंच गए हैं. मेरे इंडिया के नंबर में कुछ नेटवर्क की भी समस्या थी.

छोटे-छोटे बच्चों को आतंकियों ने मार डाला

9 अक्टूबर की सुबह-सुबह ऑफिस से फोन आया और कहा गया कि युद्ध क्षेत्र की तरफ बढ़ो और अपना ख्याल रखकर सुरक्षित रिपोर्टिंग करना. उस सुबह हमने बहुत प्रयास किया कि कोई टैक्सी हमें तेल अवीव से दक्षिण इजरायल में गाजा बॉर्डर की तरफ ले जाए. लेकिन कोई टैक्सी ड्राइवर तैयार नहीं हुआ. गाजा बॉर्डर का नाम सुनकर सभी टैक्सी चालक जाने से मना कर दे रहे थे. फिर मैं अपने कैमरामैन के साथ रेलवे स्टेशन की तरफ आगे बढ़ा और ट्रेन से Ashkelon के लिए रवाना हो गया. इस ट्रेन में मुझे एक इजरायली लड़की मिली जो कि फौज में अपनी सेवा दे चुकी थीं. उनके साथ बातचीत करने लगा और वो लड़की फूट-फूट कर रोने लगी. उसने बताया कि हमास के आतंकियों ने बहुत बर्बरता के साथ लोगों को मारा है. छोटे-छोटे बच्चों को गोलियों से भून दिया है. गर्भवती महिलाओं को भी नहीं छोड़ा है. महिलाओं के साथ हमास ने रेप किया है. मुझे बहुत डर लग रहा है. ये कहते ही इजरायल की यह बेटी फिर से जोर-जोर से रोने लगी. यह बेटी कांप रही थी लेकिन इसके अंदर हमास के खिलाफ एक जबरदस्त गुस्सा भी था. इनका कहना था कि इस बार हमास को नहीं छोड़ना चाहिए.

इसी बीच हम Ashkelon पहुंच गए लेकिन फिर वही समस्या कि कोई टैक्सी ड्राइवर हमें यहां पर शहर में ले जाने को तैयार नहीं हो रहा था. Ashkelon शहर में हमास ने लगभग 3,000 रॉकेट दागे थे. इस शहर के समुद्री और जमीन के इलाके से ही हमास ने घुसपैठ की थी. यहां पर हर किसी के चेहरे पर खौफ साफ नजर आ रहा था. रेलवे स्टेशन से लेकर बाहर तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस नजर आ रही थी. काफी देर बाद हमें एक टैक्सी ने सिटी सेंटर के पास छोड़ा. उसके बाद पूरे शहर में हम पैदल यात्रा कर न्यूज़ कवरेज करने लगे. हम उन इलाकों में पहुंचे जहां पर हमास के रॉकेट हमलों से घर मलबे में तब्दील हो चुके थे. कई लोग घायल हो चुके थे. हमने देखा कि घर की जगह अब सिर्फ राख मौजूद है. एक यहूदी अपनी पवित्र किताबें राख में ढूँढ कर सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा था. हमें देखकर वो यहूदी रोने लगा और कहा कि हमास ने सब कुछ खत्म कर दिया है.

हम यहां से रिपोर्ट कर ही रहे थे कि एक बार फिर रॉकेट हमले का सायरन बजा और हमें बंकर की तरफ भागना पड़ा. लेकिन हमें मात्र 10 सेकंड का समय मिला था और हम बंकर तक नहीं पहुंच पाए. सड़क किनारे ही जमीन पर लेट गए और फिर हिम्मत कर बंकर तक पहुंचे. जहां से हम रिपोर्ट कर रहे थे वहां से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर रॉकेट एक रिहायशी इलाके में गिरा, जिसमें कई लोग घायल हो गए और घरों व कारों में आग लग गई. लेकिन इस बंकर के पास से मुझे एक छोटी सी बच्ची की तस्वीर अभी भी नहीं भूल रही है. वो बच्ची अपनी मां के साथ मार्केट आई थी और रॉकेट हमले के कारण काफी डर गई थी. वो अपनी मां से लिपटकर बंकर में रोते हुए छिप गई थी.

इस जगह से हम थोड़ा और आगे बढ़े तो फिर एक बार सायरन बजा और हमें बंकर में छिपना पड़ा. इस बार रॉकेट एक बग़ल के घर में आकर गिरा और पूरे घर में आग लग गई. इसी के पांच मिनट बाद हमास का एक और रॉकेट सड़क किनारे खड़ी गाड़ी पर आकर गिरा. इस हमले से आसपास के घरों और दुकानों के शीशे टूट गए थे. लेकिन मैंने इजरायल के लोगों की देशभक्ति और ताकत की भी एक बड़ी तस्वीर देखी. हमास के हमले के तुरंत बाद ये लोग इजरायल के झंडे के साथ अपनी बालकनी में आ गए और झंडा लहरा मजबूत-एकजुट इजरायल का संदेश दिया.

अब Ashkelon से हम Sderot जाने का प्रयास करने लगे लेकिन हमें 2 घंटे तक कोई टैक्सी नहीं मिली. कोई कार सड़क पर नहीं दिखाई दे रही थी. मैंने अपने कैमरामैन एस जयदीप के साथ एक बंकर के नजदीक खड़े होकर कई कारों को हाथ दिया, कुछ चले गए. कुछ रुके लेकिन जो लोग रुके भी वो गाजा बॉर्डर का नाम सुनकर चले गए. इस 2 घंटे के दौरान कम से कम 10 बार रॉकेट हमले का सायरन बजा. हमारे लिए यह बंकर वरदान साबित हुआ, क्योंकि हम अपने पूरे सामान के साथ सड़क किनारे इसी बंकर के पास मौजूद थे. दूर-दूर तक सड़क पर कोई नहीं दिखाई दिया. इस दौरान कुछ इजरायली नागरिक आए, उन्होंने बहुत ही शक की नजर से पूछा कि कहां से हो? यहां क्या कर रहे हो? हमने बताया कि हम India से हैं और हमारा मीडिया आई कार्ड देखने के बाद कहा कि आप यहां पर ज्यादा देर खड़े मत रहिए. यह इलाका सुरक्षित नहीं है. हमास के आतंकी अभी भी इन इलाकों में घूम रहे हैं. उन युवाओं ने अपनी कार से हमें Ashkelon रेलवे स्टेशन उतार दिया और फिर हम ट्रेन लेकर वापस तेल अवीव आ गए.

10 अक्टूबर की सुबह हम यह समझ गए थे कि बिना टैक्सी के हम गाजा बॉर्डर तक नहीं पहुंच पाएंगे. होटल के बाहर खड़े होकर मैंने कम से कम 100 टैक्सी वालों को हाथ दिया, जिसमें से 99 गाजा बॉर्डर का नाम सुनकर आगे बढ़ गए. लेकिन इसी दौरान हमें 1 फरिश्ता जैसे Avi मिले. उन्होंने कहा कि मैं आपको Sderot लेकर चलता हूं. मैं अपने इजरायल देश के लिए यही मदद कर सकता हूं. वो मुझे अपनी टैक्सी में लेकर गाजा बॉर्डर की तरफ रवाना हो गए. Ashkelon पार करने के बाद जैसे ही हम Zikim Beach और Sderot की तरफ आगे बढ़े तो इजरायल की सेना ने हमारी गाड़ी रोक दी. हमारा पासपोर्ट और आई कार्ड चेक किया. उसके बाद कहा कि मीडिया इसके आगे नहीं जा सकती है. उन्होंने हमें Sderot के दूसरे हिस्से की तरफ मुड़वा दिया. हम जैसे ही मुड़े तो देखा कि पूरी सड़क पर गोलियां पड़ी हैं. एक कार पर बुलेट के निशान हैं और अंदर खून ही खून. स्थानीय पुलिसकर्मी ने बताया कि हमास के आतंकियों ने इन सड़कों पर 7 अक्टूबर की सुबह कत्लेआम मचाया है. मैंने देखा कि इस कार पर कम से कम 50 गोलियों के निशान हैं. इस कार में 2 इजरायली नागरिक मौजूद थे और दोनों की ही मौके पर मौत हो गई थी.

ये इलाका युद्ध के मैदान से बेहद करीब था. हमें लगातार बम धमाकों की आवाज सुनाई दे रही थी. थोड़ी-थोड़ी देर में गाजा पट्टी की तरफ इजरायली हवाई हमले के बाद धुएं का गुबार दिखाई देता था. हमास के आंतकियों के रॉकेट हमले की आग इजरायली सीमा में नजर आ रही थी. यह युद्ध दोनों तरफ से बेहद आक्रामक ढंग से लड़ा जा रहा था. इस हाईवे पर इजरायली सेना की बख्तरबंद गाड़ियां और सेना के जवान बड़ी संख्या में बॉर्डर की तरफ जा रहे थे. मेरे ड्राइवर ने बताया कि बगल में ही एक किबुत्ज है, वहां चलते हैं. वहां हमास ने बड़ा हमला किया था. हम उस क्षेत्र के लिए रवाना हो गए लेकिन जैसे ही किबुत्ज के गेट के पास पहुंचा तो वहीं मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने दूर से ही बंदूक़ तान ली. मैं कार में से नहीं उतरा, मेरे ड्राइवर ने उनसे हिब्रू में बात की और उन लोगों ने तुरंत वापस जाने को कहा. जब तक हमारी गाड़ी दरवाजे से 100 मीटर दूर नहीं पहुंच गई तब तक सुरक्षाकर्मी बंदूक ताने ही रहे. इनकी कोई गलती नहीं है, जितना बड़ा आतंकी हमला इजरायल पर हुआ है उसके बाद तो हर किसी को शक की नजर से देखना इनकी मजबूरी है.

इस इलाके से निकलकर हम एक दूसरे रास्ते से गाजा बॉर्डर की तरफ बढ़ने लगे. थोड़ी दूरी पर हमें पूरा युद्ध का मैदान दिखने लगा. इजरायल के टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां यहां पर मौजूद हैं. इसी जगह से गाजा पट्टी में हमास के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा था. यह बेहद संवेदनशील क्षेत्र था तो हम ज्यादा देर नहीं रुके. यहां से आगे बढ़कर Ashkelon पहुंचे, जैसे ही यहां की नगरपालिका के पास हम पहुंचे ही थी कि Air Siren बज गया. पुलिसकर्मी, सेना के जवान और सभी मीडियाकर्मी तुरंत बंकर की तरफ भागे. हमास के द्वारा दागा गया रॉकेट Ashkelon में गिरने में सफल रहा था. यहां पर भारतीय मूल की रिकी शाई से मुलाकात हुई. उन्होंने बताया कि Ashkelon में लोग अपने घरों को छोड़ मध्य इजरायल की तरफ जा रहे हैं. लोगों बहुत डर है क्योंकि हमास का रॉकेट कब किसके घर पर गिर जाए किसी को नहीं पता. साथ ही हमास के आतंकवादी अभी भी इन इलाकों में घूम रहे हैं. रिकी शाई से बातचीत हो रही थी और इसी बीच इजरायली सेना के एक जवान आए. जो कि भारत को बहुत प्यार करते हैं उन्होंने कहा कि वो भारत जाने वाले थे लेकिन उससे पहले ये आतंकी हमला हो गया. वो भारत में ऋषिकेश जाने का प्लान कर चुके थे, गंगा नदी के किनारे वो योग और ध्यान करना चाहते थे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन की तारीफ की और कहा कि वो इन दोनों हस्तियों के बहुत बड़े फैन हैं. उन्होंने अपना नाम ना छापने की बात कही थी, इसलिए हम उनका नाम उजागर नहीं कर रहे हैं.

Ashkelon से हम Sde Yoav की तरफ आगे बढ़ गए. यहां पर एक बहुत बड़ा राहत कैंप लगाया गया है. यहां एंबुलेंस की फ्लीट खड़ी है और खाने पीने के सामान की पैकिंग की जा रही है. मैं इस स्थान पर पहुंचकर इजरायल के लोगों की देशभक्ति और राष्ट्र भावना को महसूस कर पाया. यहां स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर घर की महिलाएं हर कोई Volunteer तौर पर सेना की मदद के लिए आगे आए हुए हैं. युद्ध के मैदान से मात्र 7 KM की दूरी पर यह राहत कैंप बनाया गया है. बच्चे और महिलाएं इजरायली सेना के जवानों के लिए खाना और पानी का पैकेट तैयार कर रहे हैं. दवाइयों का किट पैक कर रहे हैं. एंबुलेंस की टीम हथियारों और वॉकी टॉकी से लैस है. उन्हें जैसे ही कोई सूचना मिल रही है, वो तुरंत युद्ध क्षेत्र में अंदर जा रहे हैं. एक एंबुलेंस चालक ने बताया कि 7 अक्टूबर की शाम वो Sderot में मौजूद था. अपनी हाथों से हमास के आतंकियों पर फायर कर लोगों की जान बचाई. एंबुलेंस चालक ने बताया कि हमास के आतंकी एंबुलेंस पर चारों तरफ से गोलियां बरसा रहे थे लेकिन हम किसी तरह से आम लोगों को वहां से बचाकर निकलने में कामयाब हो पाए थे.

Sde Yoav से अब हम तेल अवीव से लिए रवाना हो चुके थे. 8 अक्टूबर से आज 10 अक्टूबर की रात को चुकी थी. हमें शाकाहारी भोजन कहीं नहीं मिल पा रहा था. मैंने रीना पुष्करना जी के बारे में सुना था कि वो इजरायल में भारतीय रेस्टोरेंट चलाती हैं. मैंने उन्हें मैसेज किया कि क्या हमें शाकाहारी खाना मिल जाएगा. उन्होंने तुरंत कहा कि आप हमारे रेस्टोरेंट जाइए और आपको शाकाहारी खाना जरूर मिलेगा. रीना पुष्करना भारतीय मूल की इजरायली नागरिक हैं और वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी उनके इजरायल के दौरे के दौरान खाना बना चुकी हैं. रीना पुष्करना जी से काफी देर तक बातचीत हुई. उनका कहना था कि हमास ने इंसानियत का कत्ल किया है. हमास ने मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ा है और अब इजरायल भी हमास को नहीं छोड़ने वाला है. इजरायल और भारत एक साथ खड़े हैं.

11 अक्टूबर की सुबह तेल अवीव से Sderot के लिए निकल पड़े. इस बार हमारे साथ इजरायली सेना से रिटायर्ड एक जवान मौजूद थे, जो कि अपनी टैक्सी लेकर आए थे. उनका नाम है- Eli Yahu. वो हमें सीधे Sderot शहर में लेकर चले गए, जहां पर सबसे बड़ा खतरा मौजूद है. हमास के आतंकी सबसे पहले इसी शहर में घुसे थे और उनके सामने जो भी आया, उनको मौत के घाट उतार दिया. Sderot शहर में प्रवेश करते ही हमें अजीब सा सन्नाटा नजर आया. ऐसा लगा कि हम किसी Ghost City में प्रवेश कर रहे हैं. यहां दूर-दूर तक कोई आदमी नजर नहीं आ रहा था. कुछ लोग अपने घरों की खिड़कियों से जरूर झांक रहे थे. इस शहर में चारों तरफ जले हुए घर, सड़कों पर गोलियों के निशान और कई जगह खून के धब्बे नजर आ रहे थे. मैं सीधे Sderot पुलिस स्टेशन पहुंचा. इस पुलिस स्टेशन को हमास के आतंकियों ने उड़ा दिया था. यहां पर बहुत से बेगुनाह और निर्दोष लोगों को हमास ने बहुत ही बेरहमी से मारा. अब यहाँ पुलिस स्टेशन नहीं सिर्फ मलबा बचा है. मैंने देखा कि मलबे के अंदर से हमास के आतंकियों के शव भी बाहर निकाले गए. आस पास गाड़ियों के शीशे टूटे हुए थे. लाशों की बदबू आ रही थी. पुलिस स्टेशन से सटा हुआ एक स्कूल थ. वहां पर रॉकेट से हमला और गोलियां दिखाई दे रही थीं. हमास ने जब यहाँ पर हमला किया तो एक बंकर में कुछ लोगों ने छिपकर अपनी जान बचाने की कोशिश की थी लेकिन आतंकियों ने बंकर में भी ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं. बंकर में भी खून के निशान पड़े हुए थे. कुछ पर्यटकों की खून से सनी तौलिया सड़कों पर बिखरी हुई थीं. चारों तरफ बेहद दर्दनाक दृश्य था.

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