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Vande Bharat
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
देश में अपनी स्थापना के 68 गौरवशाली वर्ष पूरे कर चुकी इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ) चेन्नई, के कर्मचारियों में बेहद नाराजगी है। वजह, सरकार द्वारा वंदे भारत ट्रेन के ‘स्लीपर सेट्स’ को निजी कंपनी से तैयार कराना है। अहम बात ये है कि निजी कंपनी को आईसीएफ के भीतर ही काम करने की इजाजत दी गई है। एटक और आईसीएफ की ज्वाइंट एक्शन काउंसिल के प्रतिनिधियों का कहना है कि रेल मंत्रालय ने एक निजी कंपनी, टीटागढ़ रेल सिस्टम लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। रेलवे बोर्ड ने उपरोक्त निजी कंपनी को आईसीएफ में मौजूद संयंत्र, मशीनरी व डिजाइन आदि सहित परिसर की सभी सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति दी है। इसके खिलाफ, आईसीएफ ऑल यूनियन ज्वाइंट एक्शन काउंसिल ने आंदोलन शुरू कर दिया है। कर्मियों का कहना है कि वंदे भारत ट्रेन सहित 70,000 कोच तैयार करने वाली फैक्टरी को साइड लाइन करने की तैयारी हो रही है। आखिर सरकार, निजी कंपनी पर भरोसा क्यों जता रही है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखा पत्र
आईसीएफ की ज्वाइंट एक्शन काउंसिल ने 20 सितंबर को फैक्टरी के जीएम के समक्ष अपनी बात रखी है। जीएम को भेजे पत्र में आईसीएफ और उसके कर्मियों के भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की गई है। वजह, रेलवे के बड़े नीतिगत निर्णयों में वंदे भारत ट्रेन सेट्स का निर्माण और रखरखाव, इसे प्राइवेट क्षेत्र को सौंपा जा रहा है। आईसीएफ चेन्नई ने इस फैक्टरी ने डिजाइन, गुणवत्ता और संख्यात्मक मामले में खुद को साबित कर दिखाया है। एटक महासचिव अमरजीत कौर ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि रेल कोच निर्माण का निजीकरण, देश हित में नहीं है। इस फैसले को वापस लिया जाना चाहिए। एटक का दृढ़ मत है कि आईसीएफ के परिसर में कोच निर्माण और कोचों के रखरखाव का निजीकरण करना, राष्ट्र हित के खिलाफ है। रेल मंत्रालय द्वारा इस तरह का कदम उठाने के पीछे आईसीएफ प्रबंधन की ओर से यह वजह बताई जा रही है कि मौजूदा मैनपावर के साथ उत्पादन लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता है।
कौन भरेगा 1400 से अधिक रिक्तियां
अमरजीत कौर ने कहा, अगर आईसीएफ चेन्नई में विभिन्न श्रेणियों के तहत 1400 से अधिक रिक्तियां हैं, तो उन पदों को भरने की मंजूरी देना रेलवे बोर्ड का काम है। रेलवे बोर्ड और निजी उद्योग के बीच हस्ताक्षरित दस्तावेज बताते हैं कि आईसीएफ की उत्पादन क्षमता से लेकर बाकी सभी सुविधाओं का इस्तेमाल, निजी कंपनी द्वारा किया जाएगा। निजी कंपनी को आईसीएफ डिजाइन और ड्राइंग का उपयोग करने की भी स्वतंत्रता होगी। ऐसे में यह बात समझ से परे है कि रेलवे बोर्ड को आईसीएफ की कीमत पर निजी कॉरपोरेट्स को संरक्षण क्यों देना चाहिए। ऐसा निर्णय लेने से पहले ट्रेड यूनियनों से चर्चा नहीं की गई। एटक मांग करती है कि देशहित में यह फैसला वापस लिया जाए। विनिर्माण प्रणाली और रेलवे कोचों की गुणवत्ता पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। सरकारी स्वामित्व वाले आईसीएफ परिसर के भीतर निजी कंपनी के साथ वंदे भारत ट्रेन सेट के लिए विनिर्माण/रखरखाव समझौते को रद्द किया जाए। इस फैक्टरी ने डिजाइन, गुणवत्ता और संख्यात्मक मामले में खुद को साबित कर दिखाया है। आईसीएफ, अपने मेहनती स्टाफ की वजह से किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम है। इसी के चलते आईसीएफ प्रबंधन और रेलवे के साथ कर्मियों का सहयोगी रिश्ता रहा है। इस फैक्टरी ने 70,000 से अधिक कोच बनाए हैं, जो दुनिया में किसी भी रेल कोच निर्माता द्वारा सबसे अधिक हैं।
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