[ad_1]
सिलक्यारा सुरंग में फंसे लोगों के परिजनों का उत्तरकाशी पहुंचने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को ऊधमसिंह नगर से नफीस अहमद सिलक्यारा पहुंचे। नफीस का चचेरा भाई सबा अहमद छह दिन से सुरंग के अंदर फंसा है।
नफीस का कहना है कि चाहे कितने भी दिन रुकना पड़े, लेकिन भाई को साथ लेकर ही जाऊंगा। बताया, उनका चचेरा भाई सबा यहां फोरमैन के पद पर कार्यरत हैं। जिसे लेने के लिए वह शुक्रवार को पहुंचे हैं। कहा, उनकी भाई से बात तो नहीं कराई गई, लेकिन उनके साथी से बात हुई है। उसने बताया कि सभी सुरक्षित हैं, लेकिन कहीं न कहीं घबराए हुए हैं कि कब बाहर निकलेंगे।
यूपी के लखीमपुर खीरी से आए शत्रुघ्न लाल ने बताया, उनका भतीजा मंजीत सुरंग में फंसा हुआ है। बृहस्पतिवार को पाइपलाइन से भतीजे से बातचीत करवाई गई थी। उसने कहा कि वह सुरक्षित हैं। प्रशासन का कहना है कि अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए पूरी तैयारी हो रही है। पाइप डालने में थोड़ी दिक्कतें हो रही हैं। जल्द रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होगा और अंदर फंसे लोग बाहर आ जाएंगे।
सिलक्यारा सुरंग हादसे के बाद सुरंग के फंसे 40 मजदूरों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। गत शुक्रवार दिनभर चली एक अन्य व्यक्ति के सुरंग में फंसे होने की अफवाह पर देर रात मुहर लग गई। कंपनी प्रबंधन ने जिला प्रशासन को मुजफ्फरपुर बिहार के दीपक कुमार के सुरंग में फंसे होने की सूचना दी है।
अमेरिकी ऑगर मशीन से गत शुक्रवार दोपहर बाद ड्रिलिंग का काम बंद कर दिया गया था। जिसके बाद से अब तक मात्र 22 मीटर ही ड्रिल हो पाया है। बताया जा रहा है कि मशीन के कंपन से सुरंग में मलबा गिरने का खतरा बना हुआ है। वहीं दरारें भी आई हैं।
शनिवार को सात दिन बाद सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर नहीं निकाले जाने पर मजदूरों के सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने दोबारा कंपनी अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रेस्क्यू में तेजी लाने की मांग की।
[ad_2]
Source link