Home Breaking News पांच बैक टू बैक सुपरहिट्स, अब ब्लॉकबस्टर की वापसी कराने वाले शाहरुख का नंबर

पांच बैक टू बैक सुपरहिट्स, अब ब्लॉकबस्टर की वापसी कराने वाले शाहरुख का नंबर

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पांच बैक टू बैक सुपरहिट्स, अब ब्लॉकबस्टर की वापसी कराने वाले शाहरुख का नंबर

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19 दिसंबर 2003, वह दिन था, जिस दिन संजय दत्त और अरशद वारसी की फिल्म ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ सिनेमाघरों तक पहुंची। फिल्म का ट्रेलर आया तो लोगों को कुछ समझ नहीं आया। फिल्म आई तो लोगों ने इसे देखा भी और इसकी अंतर्धारा को भी समझा। फिल्म सुपरहिट रही। इस फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी ने इसके साथ ही हिंदी सिनेमा में दर्शकों का एक ऐसा वर्ग पहचाना, जो उनकी फिल्में उनका नाम देखकर आता है। ये किस्सा इस फिल्म के बाद ‘लगे रहो मुन्नाभाई’, ‘थ्री ईडियट्स’, ‘पीके’ और ‘संजू’ में भी दोहराया गया। सारी की सारी फिल्में सुपरहिट और राजकुमार हिरानी का सिनेमा ब्लॉकबस्टर। अब बारी ‘डंकी’ की है। ट्रेलर में फिर लोगों को दम नजर नहीं आया, लेकिन फिल्म के दमदार होने की आस अभी बाकी है।




फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर चर्चा होती है कि फिल्में स्टार के बलबूते पर चलती हैं और स्टार ही निर्देशक से बड़ा होता है। लेकिन राजकुमार हिरानी ऐसे फिल्मकार जिन्होंने पिछले दो दशक में अपनी फिल्मों के माध्यम से यह साबित किया है कि फिल्म का स्टार निर्देशक होता है। गुरुवार को राजकुमार हिरानी की शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ‘डंकी’ रिलीज होने वाली है। इस साल शाहरुख खान बॉक्स ऑफिस पर ‘पठान’ और ‘जवान’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दे चुके हैं। ऐसे में फिल्म ‘डंकी’ की सफलता का क्रेडिट किसके सिर पर होना चाहिए आइए समझते हैं, इन फिल्मों के माध्यम से। 

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राजकुमार हिरानी ने अपनी फिल्मों के माध्यम से आम जीवन की समस्याओं को पर्दे पर ऐसे पेश किया कि दर्शक उससे बड़ी आसानी से जुड़ जाते हैं। यहीं वजह है कि उनकी फिल्में सफल होती है। अभिनेता संजय दत्त के करियर की ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ और ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ सबसे बड़ी सफल फिल्में रही हैं। ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ के जरिए जहां राजकुमार हिरानी ने मेडिकल के क्षेत्र में आने वाली परेशानियों पर प्रकाश डाला वहीं ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ के जरिए गांधी जी के विचारों को ऐसे सहज भाव से पेश किया दर्शक उससे आसानी से जुड़ गए।


हर वर्ष पढ़ाई के दबाव में आकर न जाने कितने छात्र आत्महत्या कर लेते हैं। जरूरी नहीं कि मां बाप जो चाहते हैं बच्चे वही बने। फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में आमिर खान, आर माधवन और शरमन जोशी के किरदारों के माध्यम में राजकुमार हिरानी ने यही बताने की कोशिश की। इंजीनियरिंग कॉलेज और भारतीय शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत सामाजिक दबावों के बारे उन्होंने अपनी फिल्म की कहानी को ऐसे पेश किया कि इस फिल्म को दर्शकों ने आत्मसात कर लिया। यह फिल्म संदेश देती है कि डिग्री से बढ़कर ज्ञान जरूरी है। राज कुमार हिरानी कहते हैं, ‘किसी भी समाज के विकास के लिए शिक्षा बहुत ही जरूरी है लेकिन स्टूडेंट के ऊपर पढ़ाई का प्रेशर नहीं होना चाहिए।’


धर्म और आस्था को लेकर राजकुमार हिरानी ने फिल्म ‘पीके’ के माध्यम से जो सवाल उठाया है, उसको लेकर आम इंसान सदियों से भ्रमित रहा है। फिल्म की रिलीज के बाद भले ही इस फिल्म के विरोध में कुछ लोग आगे आए, लेकिन इस फिल्म के माध्यम से राजकुमार हिरानी जिस तरह का संदेश देना चाहते थे जिससे वह कामयाब रहे। वह कहते हैं, ‘हमारी फिल्म संत कबीर और महात्मा गांधी की सोच से प्रेरित थी। यह फिल्म इस विचार की पुष्टि करती है कि इस धरती पर रहने वाले सभी इंसान एक बराबर हैं। इस  फिल्म भारतीय संस्कृति, सोच और धर्म का मूल-भाव भी है।’ इस फिल्म के क्लाइमेक्स में जब आमिर खान और रणबीर कपूर मिलते हैं तो वह कमाल का सीन है। 

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