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PM Modi, Amit Shah
– फोटो : Social Media
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अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए आरएसएस-भाजपा-विहिप ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। हर राज्य के हर जिले से लेकर मंडल और बूथ स्तर तक कार्यक्रम कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा राम मंदिर निर्माण को 2024 के लोकसभा चुनाव में अपना प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाएगी। यानी 2024 की लड़ाई में विपक्ष का मुकाबला ‘राम’ के मुद्दे से होगा। क्या विपक्ष इसका मुकाबला कर पाएगा?
माना जा रहा था कि राम मंदिर का मुद्दा अब पुराना पड़ चुका है और अब भाजपा इसका कोई राजनीतिक लाभ नहीं ले सकेगी। इसके पीछे एक तर्क यह भी था कि हिंदुत्व और राम मंदिर मुद्दे के कारण जिन मतदाताओं को प्रभावित होना था, वे पहले ही प्रभावित हो चुके हैं और अब भाजपा को ही वोट कर रहे हैं। ऐसे में संभावना थी कि राम मंदिर के नाम पर भाजपा से नए मतदाता नहीं जुड़ेंगे और यह उसके लिए बहुत लाभदायक नहीं होगा।
पहली बार वोट करने वाले 15 करोड़ युवाओं पर असर
एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि पहली बार वोट करने जा रहे नए मतदाताओं में राम मंदिर मुद्दे का आकर्षण बना हुआ है और पहली बार वोट करने वाले युवाओं की एक बड़ी संख्या भाजपा को वोट कर सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पहली बार वोट करने वाले युवाओं की संख्या लगभग आठ करोड़ थी, इस बार यह आंकड़ा आश्चर्यजनक रूप से 15 करोड़ के लगभग हो सकती है।
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