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Covid-19: शोधकर्ताओं ने चेताया- बढ़ता संक्रमण ला सकता है ‘हार्ट फेलियर महामारी’, हर उम्र के लोग रहें सावधान

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Covid-19: शोधकर्ताओं ने चेताया- बढ़ता संक्रमण ला सकता है ‘हार्ट फेलियर महामारी’, हर उम्र के लोग रहें सावधान

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कोरोनावायरस एक बार फिर से वैश्विक स्तर पर संक्रमण बढ़ाता हुआ देखा जा रहा। इस बार के प्रकोप के लिए ओमिक्रॉन के JN.1 वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिसके चलते एक महीने के भीतर ही चीन, सिंगापुर, अमेरिका और भारत सहित कई देशों में काफी तेजी से कोरोना के मामलों में इजाफा हुआ है। अध्ययनों में इस नए वैरिएंट की संक्रामकता दर अधिक बताई जा रही है साथ ही ये वैक्सीनेशन से शरीर में बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने वाला भी बताया जा रहा है जिसके कारण किसी आबादी में तेज गति से प्रसार का जोखिम हो सकता है।

कोरोना के बढ़ते मामले तो चिंताजनक हैं ही साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके कारण होने वाली अन्य गंभीर समस्याओं को लेकर भी लोगों को अलर्ट कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने कोविड-19 से संबंधित एक नए और चिंताजनक ‘वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम’ को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि यह “हार्ट फेलियर महामारी” का कारण बन सकता है।

जापानी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला है कि कोविड-19 मामलों में वृद्धि, विशेष रूप से JN.1 के कारण हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिसे मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।

बढ़ सकते हैं हार्ट फेलियर के मामले

हाल के सप्ताहों में अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और भारत सहित कई देशों में बड़े पैमाने पर नए स्ट्रेन JN.1 के कारण कोविड के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे संभावित रूप से हृदय रोगों की आशंका बढ़ सकती है। यह उन लोगों के लिए और भी समस्याकारक है जो पहले से ही इस बीमारी से ग्रस्त हैं।

जापान के शीर्ष शोध संस्थान रिकेन के वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट में चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि कोरोना के कारण पहले भी हृदय स्वास्थ्य पर गंभीर असर देखा गया था, इसका फिर से बढ़ना नई मुसाबतों का कारण हो सकता है।

हृदय पर कोरोना का असर अधिक

शोधकर्ताओं ने बताया कि इंसानों में संक्रमण की स्थिति में कोरोनावायरस ACE2 रिसेप्टर्स के साथ बाइंड होता है। इसी की मदद से ये शरीर में अपने आपको बढ़ाता है। ये रिसेप्टर्स हृदय में ‘बहुत आम’ हैं। इसका मतलब यह है कि वायरस की चपेट में आने वाले लोगों में हृदय की बीमारियों का खतरा और हृदय की कार्यप्रणाली में कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

शोध में चेतावनी दी गई है कि ‘सार्स-सीओवी-2 (कोविड-19) के लगातार संक्रमण के कारण भविष्य में हृदय विफलता के जोखिम वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ने की आशंका है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

रिपोर्ट में कहा गया है, भले ही इस बात के निर्णायक नैदानिक साक्ष्य नहीं मिले हैं फिर भी लगातार कोरोना संक्रमण का बढ़ना हृदय संबंधी कार्यों में गिरावट का कारण बनता हुआ देखा जा रहा है। 

रिकेन में अनुसंधान प्रमुख हिदेतोशी मासूमोतो कहते हैं, कोरोनावायरस से संक्रमित कुछ लोगों के हृदय में वायरल संक्रमण हो सकता है। वायरस से संक्रमण के कारण हृदय की कार्यक्षमता में कमी आई है, इंफ्लामेशन का जोखिम भी बढ़ा है। महामारी के दौरान किए गए कई अन्य अध्ययनों में भी इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि कोरोनावायरस, हृदय स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। हमें इसके कारण होने वाले जोखिमों को लेकर सावधान रहने की आवश्यकता है।

हृदय रोगों से मृत्यु का खतरा

जनवरी 2023 में जर्नल कार्डियोवस्कुलर रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन में कोरोना के कारण हृदय पर होने वाली समस्याओं को समझने के लिए शोध किया गया। इसमें पहले से हृदय रोगों वाले और बिना हृदय रोग वाले 7,500 से अधिक लोगों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में गंभीर संक्रमण हुआ था उनमें हृदय रोग विकसित होने का खतरा लगभग 40% अधिक और 18 महीनों के दौरान हृदय रोगों से मौत का जोखिम पांच गुना अधिक था।

शोधकर्ताओं ने बताया, कोरोना का संक्रमण अल्पावधि और दीर्घकालिक दोनों रूप में हृदय और संचार प्रणाली की समस्याओं को बढ़ा सकता है।

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स्रोत और संदर्भ

Predicted risk of heart failure pandemic due to persistent SARS-CoV-2 infection using a three-dimensional cardiac model

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