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इजरायल और हमास के आतंकियों के बीच छिड़ी लड़ाई में अब ईरान भी झुलसने लगा है. हाल ही में सीरिया में इजरायल की एयरस्ट्राइक में रिवॉल्यूशनरी गार्ड के बड़े एडवाइजर की मौत हो गई. इसके बाद कासिम सुलेमानी की कब्र के पास दो बड़े धमाके हुए, जिसमें 95 लोगों की जान चली गई. सुलेमानी वही शख्स है जिसे चार साल पहले अमेरिका ने एक ड्रोन हमले में ढेर कर दिया था. उधर, ईरान की मदद से चल रहे हिजबुल्ला और हूती विद्रोहियों पर भी जवाबी कार्रवाई शुरू हो गई है. अब ईरान के सुप्रीम लीडर ने प्रतिज्ञा की है कि जिसने भी करमान में हमले कराएं हैं उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा.
इजरायल के बारे में उन्होंने साफ कहा है कि अमेरिका की मदद के बिना यह कुछ भी नहीं है. उन्होंने कहा कि इजरायली बमबारी से उसके ही बंधक मर रहे हैं. इससे पहले वह मुस्लिम देशों से इजरायल का बहिष्कार करने का आह्वान कर चुके हैं.
इधर, लाल सागर में हुती विद्रोहियों ने आतंक मचा रखा है. वे अमेरिका और इजरायल को निशाना बनाने की कोशिश की है. गौर करने वाली बात यह है कि ईरानी लीडर अली खामेनेई ने सीधे तौर पर अमेरिका की सेना से भिड़ने से मना किया है. ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या वह ‘अपने लड़ाकों’
के जरिए लाल सागर को खून से लाल करने वाले हैं?
हां, ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा है कि जिसने भी इन हमलों की साजिश रची उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी भी कह रहे हैं कि जल्द ही दोषियों को दंडित किया जाएगा. आमतौर पर शिया बहुल ईरान में इस तरह के हमले इस्लामिक स्टेट जैसे सुन्नी आतंकी संगठन करते रहे हैं. लेकिन इस बार उंगली इजरायल और उसका समर्थन कर रहे अमेरिका पर उठ रही है. ईरान के राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर यहूदी सरकार की बात की है. ऐसे में अली खामेनेई ने यह तो कहा कि दुश्मन को कड़ा जवाब देंगे लेकिन अमेरिका पर संयम भी बरतने को कहा.
आज दोपहर ईरान के लीडर का बयान का आया है जिसमें उन्होंने अपने कमांडरों को अलर्ट किया है कि करमन आतंकी हमले के जवाब में अमेरिका के साथ सैन्य संघर्ष से बचा जाए. उन्होंने इजरायल के खिलाफ ऑपरेशन सीमित रखने को कहा है. हां, अमेरिकी बेसों को निशाना जरूर बनाया जा सकता है. रूस ने ईरान में हुए धमाकों पर दुख जताया है.
क्या ईरान की बात मानेंगे मुस्लिम देश?
हां, ईरान के सुप्रीम लीडर ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि इस्लामिक देशों का यह कर्तव्य है कि वह इजरायल जा रहे तेल, ईंधन और दूसरे सामानों को रोके. इससे पहले भारत से पश्चिम में समंदर में एक ब्रिटिश शिप पर ड्रोन हमला हुआ था. यह शिप लाइबेरिया का था और इसका इजरायल कनेक्शन भी पता चला. खबर आई थी कि जिस ड्रोन से हमला हुआ वो ईरान से ही भेजा गया था.
उधर, लाल सागर में जहाजों पर हो रहे हमलों के मद्देनजर अमेरिका ने हूतियों को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है. अमेरिका और 12 सहयोगी देशों ने हूती विद्रोहियों को चेतावनी दी है कि उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है. दरअसल, इजरायल-हमास युद्ध के जवाब में यमन के आतंकियों ने 23 से ज्यादा हमले किए हैं. हूतियों को ईरान से समर्थन मिलता रहता है. अमेरिका ने कहा है कि यह उसकी तरफ से आखिरी चेतावनी है.
अमेरिका के साथ ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, इटली, जापान, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और ब्रिटेन भी साथ हैं. हूतियों ने कुछ जहाजों और चालक दल को भी पकड़ रखा है. उधर, हूती कह रहे हैं कि लाल सागर में उन जहाजों पर हमले करेंगे, जो इजरायल के हैं या इजराइली बंदरगाहों की ओर जाएंगे. इसके जरिए वे गाजा पट्टी में इजरायली हमले रोकना चाहते हैं. एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले समुद्री क्षेत्र में इस समय अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के युद्धपोत गश्त कर रहे हैं. संडे को एक मालवाहक जहाज पर हमला हुआ तो अमेरिकी हेलिकॉप्टर ने हूती विद्रोहियों को मार गिराया.
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