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अंतरिक्ष में भेजा गया प्राइवेट मून लैंडर- पेरेग्रीन-वन (वीडियो स्क्रीनशॉट)
– फोटो : social media
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विज्ञान और तकनीक से लैस पीढ़ी अंतरिक्ष को एक्सप्लोर करने की महत्वाकांक्षा भी रखती है। इसी कड़ी में अमेरिका से निजी मून लैंडर चांद की तरफ लॉन्च किया गया। हालांकि, पेरेग्रीन- वन नाम के इस मिशन को बड़ा झटका लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका से चांद की सतह पर भेजा गया निजी मून लैंडर- पेरेग्रीन-1 में तकनीकी खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 52 साल के बाद अमेरिका ने पहली बार चांद की सतह चूमने का प्रयास किया है। इससे पहले 1972 में अमेरिकी यान- अपोलो-17 मिशन चांद की सतह पर उतारा गया था।
खबर के मुताबिक अंतरिक्ष जगत में काम करने वाली अमेरिकी कंपनी एस्ट्रोबोटिक पेरेग्रीन-1 का प्रक्षेपण कंट्रोल कर रही है। तकनीकी गड़बड़ी की खबरों पर कंपनी ने कहा, योजना के अनुसार यान अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा, लेकिन वल्कन रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग होने के बाद कुछ खामियां सामने आईं। रॉकेट यूनाइटेड लांस एलायंस ने बनाया है। पेरेग्रीन लैंडर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी- NASA की तरफ से टेलीमेट्री रिसीव करने लगा, जो योजना का हिस्सा नहीं। लैंडर और नासा के डीप स्पेस नेटवर्क के संपर्क पर और विवरण जुटाए जा रहे हैं। वैज्ञानिक समस्या के समाधान का प्रयास कर रहे हैं।
कंपनी का कहना है कि पेरेग्रीन का प्रणोदन प्रणाली सफलतापूर्वक एक्टिव हुआ, लेकिन, इसके बाद यह सेफ मोड में चला गया। एस्ट्रोबोटिक की टीम को सिग्नल मिलना बंद हो गया। कंपनी के मुताबिक इस लैंडर पर वैज्ञानिक उपकरणों के साथ-साथ स्टार ट्रेक के कई कलाकारों के अवशेष रखे गए हैं। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति कैनेडी का डीएनए भी चांद की सतह पर भेजा गया है।
अमेरिका ने 1972 के बाद चांद पर लैंड करने वाला मिशन पूरा नहीं किया है। पांच दशक से भी अधिक पहले अमेरिका ने दो लोगों को चांद की सतह पर उतारा था। अब अगले कुछ साल में आर्टेमिस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चांद की सतह पर भेजने की योजना बन रही है। इससे पहले प्राइवेट मून लैंडर- पेरेग्रीन-वन भेजा गया है। हालांकि, इसमें नासा नहीं, निजी कंपनी– एस्ट्रोबोटिक की भूमिका है।
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