Home Breaking News ‘उन दिनों मैं प्रेम में..’: जब पत्नी के लिए नारायणमूर्ति ने बिना टिकट किया था सफर, ट्रेन में ही बिताए थे 11 घंटे

‘उन दिनों मैं प्रेम में..’: जब पत्नी के लिए नारायणमूर्ति ने बिना टिकट किया था सफर, ट्रेन में ही बिताए थे 11 घंटे

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‘उन दिनों मैं प्रेम में..’: जब पत्नी के लिए नारायणमूर्ति ने बिना टिकट किया था सफर, ट्रेन में ही बिताए थे 11 घंटे

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Narayana Murthy Travelled eleven hours in train with no tickets For Sudha Murty

Narayana Murthy and Sudha Murthy
– फोटो : Social Media

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इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायणमूर्ति ने पत्नी सुधा मूर्ति को लेकर एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने उन दिनों को याद किया, जब वे सुधा मूर्ति को छोड़ने के लिए ट्रेन में बिना टिकट के 11 घंटे सफर किए थे। बता दें कि इसका खुलासा अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की लेखिका चित्रा बनर्जी दिवाकरुनी ने अपनी किताब एन अनकॉमन लव: द अर्ली लाइफ ऑफ सुधा एंड नारायण मूर्ति में किया। यह किताब नारायणमूर्ति और सुधा मूर्ति केजीवन पर ही आधारित है। 

नारायणमूर्ति ने सुधा मूर्ति के साथ अपने रिश्तों का किया जिक्र

मीडिया से बात करते हुए कृष्णमूर्ति ने बताया कि उनदिनों वह प्रेम में थे। उन्होंने कहा, ‘आप समझ रहे होंगे कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूं। उस समय हार्मोन सक्रिय हो रहे होंगे। आप जानते हैं कि यह कैसा होता है। वह एक अलग उम्र था, लेकिन मैं एक स्थाई शादी की बात कर रहा हूं और जब बच्चे होते हैं तो रिश्ते की सुंदरता और बढ़ जाती है। रिश्तों में भी मसाला की आवश्यकता होती है।’

सुधा को कंपनी से बाहर रखना बड़ी गलती: नारायण मूर्ति

हाल ही में नारायणमूर्ति ने यह स्वीकार्य किया कि उन्होंने सुधा को कंपनी से बाहर रखकर गलती की। उन्होंने बताया कि सुधा उनसे और इस टेक कंपनी के अन्य छह संस्थापकों से ज्यादा योग्य हैं। अपनी पत्नी को कंपनी में शामिल न होने के लिए कहने पर अपना तर्क देते हुए नारायणमूर्ति ने बताया कि उनदिनों उनका मानना था कि किसी को भी अपने परिवार को अपनी कंपनी में नहीं लाना चाहिए। 

नारायणमूर्ति ने कहा, ‘मुझे लगा कि अच्छे कॉरपोरेट गवरनेंस का मतलब इसमें अपने परिवार को शामिल न करना है। क्योंकि उन दिनों बच्चे कंपनी चलाते थे और कई नियमों का उल्लंघन करते थे। लेकिन कुछ साल पहले मैंने इसपर कई प्रोफेसरों से बात की और उन्होंने बताया कि मैं गलत था। उन्होंने बताया कि दूसरे व्यक्ति में भी योग्यता है, चाहे वह आपकी पत्नी हो, बेटा हो या बेटी। आपके पास उस व्यक्ति को कंपनी का हिस्सा बनने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है।’ हालांकि, नारायणमूर्ति ने बताया कि वह उनदिनों के विचारधाराओं से प्रभावित ते। 

 






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