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Hisar HAU: मधुमेह से बचाएगा काला गेहूं; कैंसर और दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद, ये संस्थान मिलकर उगा रहे फसल

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Hisar HAU: मधुमेह से बचाएगा काला गेहूं; कैंसर और दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद, ये संस्थान मिलकर उगा रहे फसल

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Black wheat will prevent diabetes, Beneficial for cancer and heart patients, Hisar HAU institutions growing

काला गेहूं
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और मोहाली के एक संस्थान ने मिलकर रोग प्रतिरोधक रंगीन गेहूं विकसित किया है। यह गेहूं लोगों को न सिर्फ मधुमेह जैसी बीमारी से बचाता है, कैंसर और दिल के मरीजों के लिए भी काफी फायदेमंद है। इस गेहूं में भरपूर मात्रा में एंथोसाइनिन पिगमेंटेशन नामक तत्व पाया जाता है जो एंटीआक्सीडेंट का काम करता है। रंगीन गेहूं से बनी रोटी और दलिया खाने से शरीर में मौजूद जहरीले पदार्थ अपशिष्ट के रूप में शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार और नेशनल एग्री फूड बायोटेक इंस्टीट्यूट ने 2019 में एक समझौता किया था, जिसके तहत मोहाली में रंगीन गेहूं पैदा किया जाना था और हिसार के गेहूं विशेषज्ञों को गेहूं की दूसरी किस्मों के साथ संवर्धन कराकर इसका उत्पादन बढ़ाना था। इस दिशा में काम करते हुए गेहूं वैज्ञानिकों ने अब न सिर्फ काले रंग का गेहूं ईजाद किया है, वरन इसका अच्छा उत्पादन भी लिया जा रहा है। एचएयू की प्रयोगशाला मे अब पारंपरिक गेहूं के साथ काले, नीले और बैंगनी रंग के गेहूं भी पैदा हो रहे हैं, जो पौष्टिक तत्वों से भरपूर हैं। वैज्ञानिक अब इस दिशा में काम कर रहे हैं कि इन रंगीन गेहूं की किस्मों से भी सरबती गेहूं की ही तरह प्रति हेक्टेयर उत्पादन लिया जाए ताकि पौष्टिकता के साथ गेहूं की प्रचुरता भी बरकरार रहे।

एचएयू के गेहूं विशेषज्ञ डाॅ.ओपी बिश्नोई बताते हैं कि उत्तरी भारत में पैदा होने वाले आम गेहूं में एंथोसाइनिन पिगमेंटेशन की मात्रा महज 5 से 10 पीपीएम यानि पार्ट पर मिलियन होता है। बैंगनी गेहूं में इसकी मात्रा 40 पीपीएम तक होती है तो नीली में इसकी मात्रा 80 पीपीएम तक मिलती है। सबसे अधिक एंथोसाइनिन काला गेहूं में होता है। काले गेहूं में इसकी मात्रा 140 पीपीएम तक होती है। गेहूं में मौजूद यही एंटीऑक्सीडेंट तत्व बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है और शुगर, कैंसर और ह्दयाघात जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र को भी दुरूस्त रखता है। वे कहते हैं कि डाक्टर बीमार लोगों को ब्लैक बेरी, चुकंदर और जामुन जैसे फल खाने की सलाह देते हैं, क्योंकि इसमें एंथोसाइनिन अधिक होता है। एचएयू की मदद से विकसित रंगीन गेहूं के खाने के भी यही फायदे हैं।

सामान्य गेहूं के बराबर उत्पादन लाना लक्ष्य

गेहूं की पौष्टिकता बढ़ाने में सफल कृषि विशेषज्ञों का लक्ष्य इसका उत्पादन दर बढ़ाना है। गेहूं विशेषज्ञ डाॅ.ओपी बिश्नोई और कुलपति डॉ.बीआर कम्बोज कहते हैं कि अभी इस किस्म का उत्पादकता दर सरबती गेहूं से 15 से 20 प्रतिशत तक कम है। सरबती गेहूं का उत्पादन 50 से 60 हजार क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य रंगीन गेहूं की भी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर सरबती के बराबर करना है।

अधिकारी के अनुसार

रंगीन गेहूं में एंथोसाइनिन की अधिकता के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। हमारा लक्ष्य अब इसका उत्पादन बढ़ाकर सरबती के बराबर करना है। इसमें काफी हद तक सफलता भी मिल रही है। हम उत्पादन लक्ष्य के काफी करीब हैं। -डाॅ.ओपी बिश्नोई, गेहूं विशेषज्ञ, एचएयू, हिसार।

 

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