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Budget: चुनावी साल में राजकोषीय घाटा कम करने पर रह सकता है सरकार का जोर, पूंजीगत व्यय पर जारी रहेगा फोकस

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Budget: चुनावी साल में राजकोषीय घाटा कम करने पर रह सकता है सरकार का जोर, पूंजीगत व्यय पर जारी रहेगा फोकस

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Interim Budget 2024: Govt may lower fiscal deficit in election year, focus still on capex

अंतरिम बजट 2024
– फोटो : amar ujala

विस्तार


अर्थशास्त्रियों पर रॉयटर्स की ओर से किए गए एक पोल के अनुसार पूंजीगत व्यय को सर्वकालिक उच्च स्तर पर उठाने के बावजूद भारत सरकार 2024-25 वित्तीय वर्ष में कम घाटे का लक्ष्य रखेगी। अर्थशास्त्रियों का यह भी मानना है कि बुनियादी ढांचे में निवेश सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी। चुनावी वर्ष में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीसरे कार्यकाल के कयास लगाए जा रहे हैं अंतरिम बजट से लोकलुभावन उपायों और राजकोषीय विवेक के बीच संतुलन बनाने की उम्मीद की जा रही है। 

राजकोषीय घाटे को अगले वित्तीय वर्ष में 4.5% तक लाने का लक्ष्य

सरकार 2025-26 वित्तीय वर्ष (FY) के अंत तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.50% तक सीमित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जो चालू वर्ष में मार्च 2024 के अंत तक 5.90% है। 41 अर्थशास्त्रियों पर 10 से 19 जनवरी के बीच हुए पोल से पता चला है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में 2024-25 में जीडीपी के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटे को 5.30% तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वे के अनुसार 2025-26 में 4.5 फीसदी के घाटे के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुल व्यय में औसतन प्रति वित्त वर्ष सात फीसदी से अधिक की वृद्धि की जरूरत नहीं होगी

अगले वित्तीय वर्ष में पूंजीगत व्यय 15% बढ़कर 11.50 ट्रिलियन रुपये होने का अनुमान

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के प्रमुख अर्थशास्त्री एलेक्जेंड्रा हरमन ने कहा, “आने वाले वर्षों में व्यय में और भी आक्रामक कटौती की संभावना है।” पूंजीगत खर्च पहले ही इस वित्तीय वर्ष में 33% से अधिक बढ़कर 10 ट्रिलियन रुपये ($ 120 बिलियन) हो गया है और निजी निवेश में वृद्धि की उम्मीद के साथ अगले वित्तीय वर्ष में इसके 15% बढ़कर 11.50 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

मानव संसाधन में सुधार के लिए सरकार शिक्षा पर खर्च को दे सकती है प्राथमिकता

हरमन ने कहा, “निजी निवेश चक्र को पुनर्जीवित करने के लिए भारत के बुनियादी ढांचे में निरंतर और तेजी से सुधार सर्वोपरि होगा। भारत की विशाल क्षमता का लाभ उठाने और मध्यम से लंबी अवधि में सतत और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए, मानव संसाधन में सुधार करने की आवश्यकता होगी, यही कारण है कि शिक्षा पर खर्च सरकार की मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए।

अर्थशास्त्रियों का मत- बुनियादा ढांचा निवेश पर बना रहेगा सरकार का जोर

लगभग सभी अर्थशास्त्रियों (34) ने कहा कि बुनियादी ढांचा निवेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी, इसके बाद ग्रामीण विकास पर 17 और रोजगार सृजन को 16 अर्थशास्त्रियों ने सर्वोच्च प्राथिमकता का क्षेत्र बताया। घाटे पर ध्यान केंद्रित करने के साथ कल्याणकारी योजनाओं में और अधिक इजाफे की उम्मीद कम है इसके 15.60 ट्रिलियन रुपये की सकल उधारी चालू वित्तीय वर्ष की तरह अपरिवर्तित रहने का अनुमान है।

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