Home Breaking News Rani Durgavati Tiger Reserve: वल्चर रेस्टोरेंट बनाकर बढ़ाएंगे गिद्धों की प्रजाति, अप्रैल से शुरू होगा कार्य

Rani Durgavati Tiger Reserve: वल्चर रेस्टोरेंट बनाकर बढ़ाएंगे गिद्धों की प्रजाति, अप्रैल से शुरू होगा कार्य

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Rani Durgavati Tiger Reserve: वल्चर रेस्टोरेंट बनाकर बढ़ाएंगे गिद्धों की प्रजाति, अप्रैल से शुरू होगा कार्य

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Rani Durgavati Tiger Reserve: Will increase the species of vultures by building a vulture restaurant

रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में गिद्धों की प्रजाति बढ़ाने की पहल
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


मध्यप्रदेश के नौरादेही अभयारण्य को मिलाकर बनाए गए रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में अब भारत से विलुप्त हो रही गिद्धों की प्रजाति को बढ़ाने के लिए नया प्रयास शुरू हो रहा है। यहां वल्चर रेस्टोरेंट बनाया जा रहा है आने वाले कुछ महीनों में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा।

क्या है वल्चर रेस्टोरेंट

वल्चर रेस्टोरेंट का मतलब ऐसी जगह से है, जहां गिद्धों के लिए सही आहार उपलब्ध हो। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में गिद्ध रेस्टोरेंट के लिए तीन जगह चिन्हित की गई हैं। इसमें नरसिंहपुर जिले के डोगरगांव में दो जगह जबकी तीसरा स्थान नौरादेही का मोहली होगा। यहां पर लगभग दो हेक्टेयर क्षेत्र को तार से घेरकर एक बाड़ा बनाया जाएगा। इसमें मृत मवेशियों के मांस का परीक्षण करने के बाद गिद्धों को परोसा जाएगा। इसके बाद इन स्थानों पर गिद्धों की सख्या और बढ़ने लगेगी। कहा जाता है कि मांस को देखकर ही गिद्ध एकत्रित होते हैं यदि प्रयास सफल रहा तो टाइगर रिजर्व में गिद्धों की तादाद कुछ ही वर्षों में दोगनी या तीन गुनी हो सकती है।

यह है गिद्धों की स्थिति

कभी गिद्ध भारत की पहचान होते थे, लेकिन धीरे- धीरे इनकी संख्या घटने लगी और नौबत ये आ गई कि गिद्ध प्रजाति भारत से लुप्त होने की कगार पर पहुंच गई। बात मध्यप्रदेश की करें तो पूरे मप्र में गिद्ध दस हजार से ऊपर ही बचे हैं। ऐसी स्थिति में गिद्धों को बचाने के लिए वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में यह प्रयास उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा और उन्होंने इस अभियान को शुरू करने की मंजूरी दे दी। 2021 में यदि नौरादेही अभयारण्य में गिद्ध गणना की बात करें तो यहां मात्र 300 गिद्ध थे, लेकिन उसके बाद इस संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

यहां से आएगा मांस

टाइगर रिजर्व में गिद्धों की प्रजाति बढ़ाने के लिए जो प्रयास शुरू हो रहे हैं उसके लिए बड़ी मात्रा में मवेशियों के मांस की जरूरत पड़ेगी। क्योंकि गिद्धों का मुख्य आहार मवेशियों का मांस है। इसलिए टाइगर रिजर्व के अधिकारी गौशालाओं से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं। वहां प्रतिदिन मवेशियों की मौत होती है जिनको गौशाला संचालक जमीन के नीचे दफना देते हैं। टाइगर रिजर्व के अधिकारी अब उन मवेशियों को दफनाने की जगह लैब भेजेंगे। मृत मवेशियों के मांस का पहले परीक्षण होगा यदि वह मांस सही निकला तो उसको उस रेस्टोरेंट में रखा जाएगा उसके बाद उस मांस को गिद्धों को परोसा जाएगा।

अप्रैल में शुरू होगा कार्य

वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में गिद्धों के संरक्षण के लिए यह कार्य अप्रैल से शुरू होगा। जिन स्थानों पर यह मांस गिद्धों को परोसा जाएगा उन स्थानों को भी सुरक्षित किया जा रहा है। वर्तमान समय में टाइगर रिजर्व में सात प्रजाति के गिद्ध हैं। उसमें वह प्रजाति भी शामिल है जो लुप्त होने की कगार में है। टाइगर रिजर्व में पदस्थ अधिकारियों का मानना है कि यह प्रयास सफल होता है तो रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भविष्य में गिद्धों की संख्या में काफ़ी बढ़ोतरी होगी।

रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डारेक्टर अब्दुल अंसारी ने बताया कि पूर्व में हमारे भारत में गिद्धों की संख्या काफ़ी अधिक थी, लेकिन कुछ वर्ष पूर्व डाइको फिनाक नामक दवा आई थी। यह दवा मवेशियों को बुखार आने पर दी जाती थी, लेकिन जब मवेशियों की मौत हुई और उनके मांस को गिद्धों ने खाया तो उनकी मौत होती गई। नौबत यह आ गई कि गिद्ध की प्रजाति लुप्त होने की कगार में पहुंच गई। जिनको बढ़ाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। जिसके लिए वल्चर रेस्टोरेंट बनाकर गिद्धों की प्रजाति बढ़ाने का प्रयास शुरू हो रहे हैं। पूर्व में यही प्रयास नेपाल और महाराष्ट्र में किया गया था जो सफल रहा इसलिए अब यही प्रयास वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में अप्रैल से शुरू किया जा रहा है।

देश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व 

बता दें कि रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व को देश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व की पहचान मिली है, क्योंकि इसकी कुल लंबाई 2300 वर्ग किमी है और पांच साल में यहां बाघों की संख्या 19 पहुंच गई है। टाइगर रिजर्व के अंतर्गत सागर, नरसिंहपुर और दमोह जिला शामिल है। दमोह जिले के तेंदूखेड़ा और जबेरा जिसका जंगली भाग सामान्य वन क्षेत्र में आता था उसको मिलाकर टाइगर रिजर्व बनाया गया है जिसकी मंजूरी हो चुकी है, लेकिन अभी क्षेत्र हैंडओवर नहीं हुआ है।

 

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