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Budget 2024: PM Modi
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
2019 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले के बजट में मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के रूप में हर किसान परिवार को प्रतिवर्ष 6000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। देश के लगभग 11 करोड़ किसान परिवारों को इसका लाभ मिला था। इस समय भी आठ करोड़ से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिल रहा है। इस योजना के लाभार्थी किसानों ने जमकर मोदी को वोट दिया। वे रिकॉर्ड बहुमत से चुनाव जीते और लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार में प्रधानमंत्री बने। लेकिन इस बार केवल डेढ़ महीने बाद चुनाव होने के बाद भी मोदी सरकार ने ऐसी कोई बड़ी लोकप्रिय घोषणा करने से दूरी बरती है। इसका कारण क्या है।
जबरदस्त आत्मविश्वास में सरकार
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ विजय सरदाना ने अमर उजाला से कहा कि सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस समय सरकार जबरदस्त आत्मविश्वास में है। लोकप्रिय घोषणा न करना यह बताता है कि उसे अपने दस साल के कामकाज पर पूरा भरोसा है। उसे लगता है कि उसके विकास और कल्याण के कार्यों को देखते हुए जनता उसे दुबारा पूर्ण बहुमत प्रदान करेगी।
लेकिन इसके पीछे एक बड़ा आर्थिक कारण यह भी है कि कुल बजट का लगभग 92 फीसदी हिस्सा ऐसे आवश्यक कार्यों में खर्च किया जाता है, जिसमें कोई बदलाव करना संभव नहीं है। जैसे केंद्र सरकार के कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, रक्षा-शिक्षा और स्वास्थ्य सहित प्रमुख विभागों पर भारी रकम खर्च होती है। यानी सरकार के पास कोई काम करने के लिए केवल आठ फीसदी बजट ही बचा रह पाता है।
एक बेहद महत्त्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि टैक्स के रूप में केंद्र सरकार को जितनी आय होती है, उसका लगभ 42 फीसदी हिस्सा केवल पुराने कर्जों को चुकाने के लिए ब्याज के रूप में देना पड़ता है। इसके बाद सरकार के पास बहुत कम पैसा बचा रह जाता है। यही कारण है कि मेट्रो ट्रेन चलाने या बड़े निर्माण के समय सरकार को विदेश से कर्ज लेना पड़ता है।
सरकार के ऊपर पहले से चल रही कल्याणकारी योजनाओं का भारी दबाव है। प्रधानमंत्री मोदी ने मुफ्त राशन योजना को अगले पांच साल के लिए बढ़ा दिया है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने इसकी घोषणा की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि अकेली इस योजना को चलाने में हर साल करीब दो लाख करोड़ रुपये का खर्च आता है। यानी केवल इसी योजना को चलाने के लिए सरकार को अगले पांच साल में दस लाख करोड़ रुपये खर्च करना पड़ेगा।
पीएम आवास योजना पर प्रतिवर्ष लगभग 60 हजार करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के रूप में ही प्रति वर्ष लगभग 70 हजार करोड़ रुपये खर्च किया जाता है। इसी प्रकार की कई अन्य लोकप्रिय घोषणाओं पर प्रतिवर्ष भारी भरकम राशि खर्च करती है। यही कारण है कि सरकार ने कोई लोकप्रिय घोषणा करने से दूरी बरती है।
लेकिन फिर भी अच्छा बजट क्यों
विजय सरदाना ने कहा कि कई चुनौतियों के बाद भी सरकार ने बजट में कई ऐसे प्रावधान किये हैं, जिससे न केवल अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि देश के किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार ने बजट में लोकप्रिय घोषणाओं से ज्यादा लोगों की बचत कर उनकी आय बढ़ाने का काम किया है। स्टोरेज क्षमता बढ़ाने से किसानों को अपनी फसल गिरे हुए दामों पर नहीं बेचनी पड़ेगी। मोटे अनाज की उत्पादन बढ़ाने और जैविक खेती को बढ़ावा देने से भी किसानों की लागत कम होगी, जबकि उनके लाभ में बढ़ोतरी होगी। आवागमन की सुविधाओं का विकास करने से लोगों को बचत होती, इसलिए कुल मिलाकर इस बजट को अच्छा बजट कहा जा सकता है।
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