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समान नागरिक संहिता।
– फोटो : NBPGR
विस्तार
देश में इन दिनों एक बार फिर समान नागरिक संहिता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालिया बहस की वजह उत्तराखंड का प्रस्तावित समान नागरिक संहिता कानून है। दरअसल, राज्य की विधानसभा में मंगलवार को इससे जुड़ा विधेयक पेश किया था जिसे बुधवार को सदन से मंजूरी मिल सकती है।
भले ही यह कानून उत्तराखंड में लागू होने जा रहा है लेकिन इसको लेकर राजनीति देशभर में हो रही है। एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी समेत कई मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया है। इस कानून के केंद्र में संविधान का अनुच्छेद 44 है। इसे लागू करने के लिए संविधान में राज्य को शक्ति दी गई थी।
ऐसा नहीं है कि समान नागरिक संहिता का आज विरोध हो रहा है। संविधान सभा में भी इसको लेकर खूब बहस हुई थी। इस दौरान कई लोगों ने इसका विरोध किया था तो कई लोग इसके पक्ष में खड़े थे। आइये जानते हैं हमारे संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता पर क्या बहस की थी? किसने इसका समर्थन किया था? कानून के विरोध में कौन था?
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