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नई दिल्ली. भारत में क्रिकेटर बनने का ख्वाब तो हर दूसरा युवा देखता होगा, लेकिन उसे साकार कुछ ही कर पाते हैं. सचिन दास (Sachin Dhas) उन चुनिंदा युवाओं में से एक हैं, जिन्होंने अपने नाम का मान रखा और पिता की मेहनत को अंजाम तक पहुंचाया. पिता ने सचिन दास का नाम तेंदुलकर से प्रेरित होकर रखा था, जो आज अंडर19 टीम इंडिया के भरोसेमंद फिनिशर हैं. 19 साल के सचिन दास ने अंडर 19 वर्ल्ड कप (Under 19 World Cup) के सेमीफाइनल में 95 गेंद पर 96 रन की जो पारी खेली, वह बरसों याद रहने वाली है. उनकी इस पारी की बदौलत ही भारत ने हारी ही बाजी पलट दी थी और फाइनल में जगह बनाई.
सचिन दास (Sachin Dhas) आज भारतीय क्रिकेट का चमकता सितारा हैं. हर कोई उन्हें बेहतरीन फिनिशर के रूप में देख रहा है. सचिन को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए उनके पिता संजय दास की कड़ी मेहनत छिपी है. कम ही लोग जानते हैं कि सचिन दास महाराष्ट्र के बीड़ जिले के हैं, जो सूखाग्रस्त इलाका है. जहां पीने के पानी के लिए संघर्ष हो, वहां टर्फ की विकेट बनाना भी बड़ी चुनौती है. इसी कारण यहां ज्यादा क्रिकेट मैट पर खेला जाता है. लेकिन पिता संजय दास और कोच शेख अजहर को जल्दी ही यह एहसास हो गया कि सचिन को सफल क्रिकेटर बनाना है तो टर्फ की विकेट चाहिए ही.
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सचिन दास के मैट से टर्फ की पिच तक का सफर भी दिलचस्प है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक 2011 तक बीड़ में टर्फ की पिच नहीं थी. पिता संजय दास ने इसका किस्सा सुनाया. वे कहते हैं, ‘भारत ने जब इस साल वर्ल्ड कप जीता और हम एकेडमी में जश्न मना रहे थे, तब कोच अजहर मेरे पास आए. उन्होंने कहा अगर सचिन को बड़ी स्क्रीन पर देखना है तो हमें टर्फ की पिच बनानी ही पड़ेगी. ये मैट पर खेलकर हमारे जैसा ही रह जाएगा.’
संजय दास के मुताबिक कोच अजहर के ऐसा कहने के अगले ही दिन से उन्होंने पिच बनाने के प्लान पर काम शुरू कर दिया. शेख अजहर ने भी इसमें पूरी दिलचस्पी ली और मदद की. दोनों ने पैसे उधार लेकर रोलर खरीदा और तीन महीने के भीतर टर्फ की छह पिच तैयार कर लीं. कोच शेख ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से कहते हैं, ‘हमने तमाम मुश्किलों के बावजूद पिच तैयार कर ली. लेकिन बीड़ में पिच को सही सलामत रख पाना भी बड़ी चुनौती थी. यहां पानी की समस्या थी. हमें हर दूसरे-तीसरे दिन पानी का टैंकर (2000 लीटर) मंगाना होता था. अच्छी बात यह है कि ये पिचें अब भी सही हैं. सचिन के अंडर19 टीम में चुने जाने के बाद एकेडमी में क्रिकेट सीखने वाले बच्चे भी दोगुने हो गए हैं.’
कोच अजहर की सचिन से बात हुई है. कोच के मुताबिक सचिन को टीम मैनेजमेंट ने फिनिशर की भूमिका दी है, जिसे वे बखूबी निभा रहे हैं. सेमीफाइनल में विनिंग पारी खेलने से पहले सचिन ने नेपाल के खिलाफ शतक भी लगाया था. इससे पहले के मैचों में उन्हें जो भी मौके मिले, उनमें 20 से ज्यादा गेंदें खेलने को नहीं मिलीं. लेकिन सचिन ने कम बॉल में भी तेजी से रन बनाकर अपनी काबिलियत साबित की है.
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Tags: India under 19, Under 19 World Cup
FIRST PUBLISHED : February 8, 2024, 06:50 IST
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