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Border: सरकार को चाहिए एक कंसलटेंट, जो बताए कि कैसे सुरक्षित हो देश की सीमा, साथ ही दे घुसपैठ रोकने का मंत्र

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Border: सरकार को चाहिए एक कंसलटेंट, जो बताए कि कैसे सुरक्षित हो देश की सीमा, साथ ही दे घुसपैठ रोकने का मंत्र

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Border: Govt needs a consultant who can help in 'effective border management' to the security forces

Border
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार


भारत सरकार को एक ऐसा कंसलटेंट चाहिए, जो देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों को ‘प्रभावी बॉर्डर प्रबंधन’ में मदद दे सके। खास बात है कि सरकार जिस किसी व्यक्ति को बतौर कंसलटेंट नियुक्त करेगी, उसे छह माह के भीतर सरकार को अपनी प्रतिभा दिखानी होगी। योग्य उम्मीदवार 20 फरवरी तक अपना आवेदन ‘क्षमता विकास आयोग’ के पास भेज सकते हैं। कंसलटेंट को बॉर्डर प्रबंधन फोर्सेज के समक्ष भविष्य में आने वाले चैलेंज की रिपोर्ट तैयार करनी होगी। ऐसे छिद्र (घुसपैठ) जो अभी तक भरे नहीं जा सके हैं, उनका विश्लेषण तैयार करना और उन छिद्रों को भरने के लिए कौन सी रणनीति अपनाई जाए, यह सब भी कंसलटेंट के कार्यक्षेत्र में शामिल होगा।

भारत की विशाल प्रादेशिक सीमाएं और रणनीतिक स्थिति, बॉर्डर एरिया को गंभीर बना देती हैं। बॉर्डर से लगते इलाकों का अपनी जातीय, सांस्कृतिक, धार्मिक और नस्लीय विन्यास उन्हें मुख्य भूमि से विशिष्ट बना देता है। क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म, क्राइम और अवैध प्रवास जैसी समस्याएं, भारतीय बॉर्डर को संवेदनशील बनाती हैं। सीमावर्ती इलाकों में विकास की कमी, यह भी एक बड़ा मुद्दा रहा है। इन सबके मद्देनजर, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से उचित बॉर्डर प्रबंधन बहुत जरूरी है। बॉर्डर की सुरक्षा के लिए अलग-अलग बल या एजेंसियां लगी हैं। देश की आंतरिक सुरक्षा के दौरान आने वाली कई चुनौतियां, बॉर्डर प्रबंधन से जुड़ी होती हैं।

क्षमता विकास आयोग का मानना है कि लद्दाख, कश्मीर, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में प्रभावी बॉर्डर प्रबंधन के लिए क्षमता आधारित समीक्षा की आवश्यकता है। बॉर्डर प्रबंधन फोर्स के कार्यों की मैपिंग के लिए क्षमता निर्माण हस्तक्षेप जरूरी है। क्षमता विकास आयोग में, बॉर्डर प्रबंधन की दिशा में प्रभावी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सीनियर लीडरशिप पोजिशन के तहत सेना से रिटायर्ड किसी एक अधिकारी की आवश्यकता है। कंसलटेंट नियुक्त करने के लिए जो योग्ताएं रखी गई हैं, उनमें सबसे पहली है कि वह व्यक्ति सशस्त्र बलों में लेवल 14 या इससे ऊपर के पद से रिटायर होना चाहिए। बॉर्डर एरिया मैनेजमेंट और विकास, इस मामले में अनुभव हासिल हो। वहां की सुरक्षा रणनीति का जानकार हो और बॉर्डर एरिया में नीतियों का क्रियान्वयन कैसे होता है, इस बारे में पर्याप्त जानकारी रखता हो। संबंधित कंसलटेंट को बॉर्डर प्रबंधन फोर्सेज के समक्ष भविष्य में आने वाले चैलेंज की रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

बॉर्डर प्रबंधन में सक्षम फ्रेमवर्क तैयार करना, संगठन में विभिन्न स्तरों पर अफसरों की भूमिका, ऐसे छिद्र जो अभी तक भरे नहीं जा सके हैं, उनका विश्लेषण तैयार करना और उन छिद्रों को भरने के लिए कौन सी रणनीति अपनाई जाए, यह सब भी कंसलटेंट के कार्यक्षेत्र में शामिल होगा। कंसलटेंट की अधिकतम आयु 64 वर्ष से अधिक न हो। यह नियुक्ति अधिकतम छह माह या 65 वर्ष की आयु तक रहेगी। कंसलटेंट को डीए, परिवहन सुविधा, आवास व फोन आदि की सुविधा नहीं मिलेगी।

एक माह के नोटिस पर उसकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। टीए मिलेगा, लेकिन वह उसके आवास से कार्यक्षेत्र की दूरी तक के लिए ही प्रदान किया जाएगा। एक माह में डेढ़ दिन की छुट्टी मिलेगी। शॉर्ट लिस्ट उम्मीदवारों का साक्षात्कार होगा। इसके लिए ‘क्षमता विकास आयोग’ की एक चयन कमेटी का गठन किया गया है। कंसलटेंट को बतौर वेतन, क्या कुछ मिलेगा, वह वित्त विभाग द्वारा 9 दिसंबर 2020 को जारी गाइडलाइन के मुताबिक तय होगा।






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