[ad_1]

पाकिस्तान चुनाव
– फोटो : Amar Ujala
विस्तार
गुरुवार को पाकिस्तान में आम चुनाव हुए। लोगों ने अपने पांच साल का भविष्य तय करने के लिए मतदान किया है। हालांकि, पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था का एक काला सच यह है कि यहां के अल्पसंख्यक आजादी के सात दशक बाद भी मतपत्र के जरिए अपनी आवाज उठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां की संसद और प्रांतीय विधानसभाओं दोनों में इस समाज का प्रतिनिधित्व न के बराबर है जबकि इस समाज के देशभर में 44 लाख से ज्यादा मतदाता हैं।
आइये जानते हैं पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए राजनीतिक व्यवस्था है? इस समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कितना है? क्या कभी इनके लिए कदम उठाए गए हैं? इस समाज का सियासी भविष्य क्या है?
[ad_2]
Source link