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पंकज सिंगटा/शिमलाः पहाड़ी क्षेत्रों में खेल कूद प्रतियोगिताओं को आयोजित करने का अलग तरीका है. अमूमन यह आयोजन सर्दियों में करवाए जाते है. क्योंकि, सर्दियों तक गांव के सभी कार्य जैसे फसलों की कटाई आदि कार्य पूर्ण हो जाते है. युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ग्रामीण, पंचायत और ओपन स्तर पर विभिन्न खेल कूद प्रतियोगिताएं करवाई जाती है, इसमें मुख्यत: क्रिकेट और बॉलीबॉल जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित होती है. सर्दियों में इसके आयोजन का मुख्य कारण स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश का होना भी है.
इन दिनों शिमला के करीब ठियोग के अंतर्गत आने वाले गांव सोई में क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है. इसमें युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक प्रतियोगिता का आयोजन करते और भाग भी लेते है. इस प्रतियोगिता में 64 टीमें भाग लेने पहुंची है, जिस मैदान में यह आयोजन करवाया जा रहा है, यहां किसी भी खिलाड़ी के साथ कोई बड़ा हादसा पेश आ सकता है. बॉल पहाड़ी से नीचे न जाए, इसके लिए जालियां लगाई गई और खिलाड़ी केवल 30 गज में ही फील्डिंग लगाने के लिए मजबूर है.
जान जोखिम में डाल कर खेला जाता है क्रिकेट
सर्दियों में फसलों की कटाई के बाद खेत खाली होते है. ऐसे में इन खेतों में सयुक्त रूप से क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता है. पहाड़ के युवाओं में क्रिकेट के क्रेज का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई स्थानों पर जान जोखिम में डाल कर युवा क्रिकेट खेलते है. पहाड़ों में ज्यादा बड़े मैदान बनाना संभव नहीं हो पाता है. मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले यहां सुविधाएं बहुत कम होती है.
पंचायतों को दी जानी चाहिए खेलों के लिए सुविधा
ठियोग के तहत आने वाली भाज पंचायत के उप प्रधान सुंदर लाल वर्मा ने कहा कि इन दिनों ग्रामीण और पंचायत क्षेत्रों में क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. सुविधाएं न होने के कारण खिलाड़ियों को और आयोजकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर मैदान नहीं है, जिस कारण ग्रामीण टैलेंट आगे नहीं बढ़ पता है. वर्मा ने आगे कहा कि खेल विभाग को चाहिए की ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए फंड दिया जाए और ग्राउंड बनाने के लिए भी पैसा खर्च किया जाए.
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FIRST PUBLISHED : February 13, 2024, 13:40 IST
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