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CAPF: केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में लोहे के संदूक को बाय-बाय, जवानों को मिलेगा ट्रॉली वाला मॉडर्न सूटकेस

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CAPF: केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में लोहे के संदूक को बाय-बाय, जवानों को मिलेगा ट्रॉली वाला मॉडर्न सूटकेस

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CAPF: Now central paramilitary forces soldiers will get modern suitcase with trolley replaced with iron trunk

CAPF (Representative image)
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार


केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीएपीएफ’ के तहत आने वाले असम राइफल, बीएसएफ, सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एनएसजी और एसएसबी के जवानों को अब लोहे के संदूक से निजात मिलेगी। इन जवानों को अब पांच साल की वारंटी वाला मॉडर्न सूटकेस विद् ट्रॉली, मुहैया कराया जाएगा। खास बात है कि जवानों को लोहे के ट्रंक के बदले जो स्मार्ट सूटकेस मिलेगा, उसे कई तरह के परीक्षणों से गुजरना होगा। हालांकि अर्धसैनिक बलों के लिए इस सूटकेस को खरीदने का प्रपोजल लंबे समय से चल रहा था। इस दिशा में कई तरह के टेस्ट, जैसे सरफेस हार्डनेस टेस्ट, हैंडल जर्क टेस्ट और स्टेंडिंग पुल हैंडल जर्क टेस्ट आदि हो चुके हैं। अब बहुत जल्द सीएपीएफ जवान, स्मार्ट सूटकेस संग नजर आएंगे।

इस ट्रॉली सूटकेस पर पांच साल की वारंटी मिलेगी। सभी बल, अपनी आवश्यकता के अनुसार इसकी खरीद कर सकते हैं। हालांकि खरीदने से पहले सूटकेस को कई तरह के मुश्किल परीक्षणों से गुजरना पड़ेगा। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल, सीआरपीएफ सहित सभी दूसरे बलों के जवानों यह स्मार्ट सूटकेस मुहैया कराया जाएगा। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की स्थापना से लेकर अभी तक जवानों को लोहे का ट्रंक मुहैया कराया जाता है। अगर इसके कई फायदे थे तो कुछ नुकसान भी थे। जैसे लोहे का ट्रंक, मजबूत रहता है। उसे बस, ट्रेन या ट्रक में जैसे मर्जी रख सकते हैं। हालांकि यहां पर जवानों को उस वक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जब उसे छुट्टी आना होता है। उसे वह ट्रंक सार्वजनिक परिवहन में अपने साथ लाने में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बस में उसे आसानी से नहीं रखा जा सकता। वजह, वह जगह बहुत ज्यादा घेरता है। इसी तरह ट्रेन में भी दिक्कत आती है। बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन से ऑटो या टैक्सी के द्वारा आना हो, तो भी लोहे का ट्रंक का आसानी से फिट नहीं होता। अगर कोई छोटा वाहन है या आटो में उसे रखना हो तो ट्रंक के बाद किसी दूसरे सामान या सवारी के लिए जगह कम ही बचती है।

इन बलों के जवानों को अब जो मॉडर्न सूटकेस विद् ट्रॉली मुहैया कराया जाएगा, उसकी अपनी कई खूबियां हैं। जैसै, वह लोहे के ट्रंक की तुलना में काफी हल्का है। उसे साथ ले जाना आसान है। वह निजी या सार्वजनिक परिवहन के साधन में एडजस्ट हो सकता है। किसी भी बल को खरीद से पहले सूटकेस का परीक्षण, टेस्टिंग लैब या फैक्ट्री परिसर में कराना होगा।

सूटकेस में थ्री प्वाइंट लॉकिंग सिस्टम व एंटी थैफ्ट सिक्योर जिपर रहेगा। पॉलीप्रोपाइलीन हार्ड टॉप बॉडी से बने सूटकेस से लंबी दूरी के सफर में दिक्कतें पेश नहीं आती हैं। यह रफ हैंडलिंग वाला सूटकेस है। सफर में इस पर स्क्रेच आदि लगने का भी डर नहीं है। इसमें पहिये लगे होंगे। सूटकेस को 22 किलो तक के सामान के साथ पुल हैंडल ट्यूब व सरफेस हार्डनेस टेस्ट आदि से गुजरना पड़ेगा। सूटकेस के पहियों का परीक्षण करने के लिए एक ही दिशा में उसे 16 किलोमीटर चलाने का टेस्ट होगा।  

इनके अलावा हैंडल जर्क टेस्ट, ड्रॉप टेस्ट और टंबर टेस्ट भी कराया जाएगा। ये देखना होगा कि टंबल टेस्ट के दौरान सूटकेस का न तो रंग खराब हुआ हो और न ही क्रेक आया हो। पुल हैंडल टेस्ट में मल्टी पुश पुल हैंडल साइकिल टेस्ट, हैंगिंग पुल हैंडल जर्क और स्टेंडिंग पुल हैंडल जर्क टेस्ट किया जाएगा। सूटकेस को 240 घंटे के आर्द्रता कक्ष हार्डवेयर टेस्ट से गुजरा जाएगा। लॉक ओपन एवं क्लॉज टेस्ट भी होगा। साथ ही ओवन टेस्ट भी रहेगा। इसमें 120 घंटे तक 65 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सूटकेस को रखा जाएगा।

 






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