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एलजी वीके सक्सेना
– फोटो : ANI
विस्तार
दिल्ली को विरासत के शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पत्र लिखा था। उनके अनुरोध पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री तीन एएसआई स्मारकों को सौंपने पर सहमत हुए। इनका संरक्षण, बहाली, कायाकल्प और पुनर्विकास डीडीए करेगा। इस फैसले के तहत महरौली पुरातत्व पार्क, संजय वन और शालीमार बाग पार्क का संरक्षण, बहाली, कायाकल्प और पुनर्विकास का काम डीडीए अपनी लागत पर करेगा। जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इसका समग्र देखरेख करेगा। इन तीनों पार्कों में कई एएसआई-संरक्षित स्मारक हैं, जो अब तक उपेक्षा की स्थिति में पड़े थे।
अगले एक सप्ताह में इसे लेकर डीडीए और एएसआई के बीच समझौता होगा। समझौते से पूर्व इनके विकास के लिए ड्राइंग, योजना, संसाधन जुटाना सहित अन्य काम शुरू हो गया है। इनके विकास को लेकर एलजी और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी के बीच संवाद हुआ था। इसमें इन स्थलों को जीर्णोद्धार और पुनर्विकास के लिए डीडीए को सौंपने का अनुरोध किया था।
मंत्रालय ने दिल्ली चलो, घाटा मस्जिद, उर्दू अकादमी और लाल किले के पीछे सद्भावना पार्क और चहारदीवारी वाले शहर को कायाकल्प और पुनर्विकास के लिए डीडीए को सौंप दिया है। इन पार्कों के पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए निविदाएं अग्रिम चरण में हैं।
इन बात पर बनी सहमति
- डीडीए संरक्षण कार्यों को करने के लिए अपने संसाधनों का उपयोग करेगा
- एएसआई संरक्षण कार्यों की निगरानी करेगा
- संस्कृति सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनेगी, करेगी निगरानी
इनका हुआ था विकास
पुनर्निर्मित महरौली पुरातत्व पार्क (एमएपी) में एएसआई के स्वामित्व वाले कई स्मारक हैं। इनमें बलबन का मकबरा, जमाली-कमाली मस्जिद और कई अन्य कम ज्ञात अज्ञात स्मारक और संरचनाएं जिन्हें डीडीए और वसीयत द्वारा हाल ही में बहाली अभियान के दौरान खोजा गया था। अब पुनर्विकास किया जा रहा है। संजय वन में कई मध्ययुगीन स्मारक हैं जिनमें किला राय पिथौरा शामिल है, जो तोमर राजवंश से संबंधित था।
पूर्व सल्तनत काल में यह पृथ्वीराज चौहान की राजधानी भी थी। इसमें राजों की बावली, अनंगताल बावली आदि जैसे कई स्मारक भी हैं। जबकि शालीमार बाग में मुगल वास्तुकला के विभिन्न अवशेषों के अलावा शीश महल और एक विस्तृत मुगल गार्डन भी है। शालीमार बाग में बादशाह औरंगजेब का राज्याभिषेक किया गया।
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