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अलवर में अधिवक्ताओं के बीच पहुंचा चुनावी रथ सत्ता का संग्राम
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ 27 मार्च को राजस्थान के अलवर में पहुंच चुका है। इसमें हम आप तक लोकसभा क्षेत्र की असल तस्वीर सामने रखेंगे। यहां के मतदाताओं की उम्मीदें क्या हैं और प्रत्याशी किन मुद्दों को लेकर वोटरों के बीच जा रहे हैं। बुधवार सुबह चाय पर चर्चा की गई। वोटरों के मन की बात जानने की कोशिश की गई।
एडवोकेट संजीव कारकवाल यहां का मुख्य मुद्दा विकास है। एनसीआर में होने के बाद भी यहां एनसीआर का फायदा मिल रहा है। वहां जैसी पेट्रोल-डीजल के भाव हैं। न इंडस्ट्री है। न सेंटर के ऑफिस हैं। न सुविधाएं हैं। दूसरी बात यहां जो पूर्वी नहर परियोजना थी, जो कांग्रेस के समय से अटकी थी वो आना चाहिए। लोगों को पानी नहीं मिलता। लोग भटकते हैं। लॉ एंड ऑर्डर भी यहां मुद्दा बनता है। यूपी से लगा हिस्सा है, कई तरह के अपराध हैं, उन पर रोक लगाने के लिए बहुत काम करने हैं। रेलवे को लेकर विस्तार भी जरूरत है।
पिछड़ क्यों गया अलवर की बात पर अन्य वकील साहब कहते हैं, जहां तक बाबा बालकनाथ ने विकास के लिए कुछ नहीं किया। उनके समय में कोई खास परियोजना नहीं ला पाए। अपराध बढ़ रहे हैं। आज भूपेंद्र यादव को लाया गया है, जो बाहरी हैं। बाबा बालकनाथ भी बाहरी थे। रोजगार नहीं मिलना भी बड़ी समस्या है। वकीलों के लिए भी कोई खास सुविधा नहीं है।
युवा वकील ने कहा कि अलवर से भाजपा के बड़े नेता को उतारा है। उनका राजनीतिक बड़ा कद है। वे कई सौगातें लेकर आ रहे हैं। भूपेंद्र यादव सुप्रीम कोर्ट के वकील भी हैं, राम मंदिर की सुनवाई में अहम योगदान दिया है। राजस्थान और मप्र में जल को लेकर परियोजना को लेकर भूपेंद्र यादव ने मध्यस्थता की है। ये पांच सालों से पेंडिंग थी। इससे राजस्थान के 21 जिलों को पानी के संकट से राहत मिलेगी। भारत सरकार की ओर से 90 प्रतिशत राशि मिलेगी। पहले भी विकास हुआ है।
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