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Sunita Kejriwal
– फोटो : PTI
विस्तार
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ईडी में हिरासत के बाद जिस तरह से सुनीता केजरीवाल ने सियासी अगुआई शुरू की है। उसके बात जिस तरह रामलीला के मैदान मैदान में उन्होंने अरविंद केजरीवाल की चिट्ठी के साथ भाषण दिया, उससे उनके सियासी कद का अंदाजा लगाया जाना शुरू हो गया है। सुनीता केजरीवाल अरविंद केजरीवाल की हिरासत की बाद लगातार जनता से संवाद कर सियासी मोर्चे पर डटी हैं। उससे पार्टी में उनके कद का अंदाजा स्वाभाविक रूप से अरविंद केजरीवाल के बाद नंबर दो के तौर पर लगाया जाने लगा है। सियासी जानकारों का कहना है कि रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में हो रही लोकतंत्र बचाओ रैली में पहली बार देश के बड़े नेताओं के साथ अरविंद केजरीवाल की अनुपस्थिति में सुनीता केजरीवाल ने मंच साझा कर पार्टी में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ईडी हिरासत में जाने के बाद सबसे ज्यादा सक्रियता सुनीता केजरीवाल की रही। सियासी गलियारों में चर्चा है इस बात की होने लगी कि अरविंद केजरीवाल के बाद पार्टी में नंबर दो की हैसियत उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल की हो गई है। दरअसल, दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार दोपहर को जब विपक्षी नेताओं का मंच सजा तो उस मंच पर पहली पंक्ति में बड़े नेताओं के साथ सुनीता केजरीवाल नजर आईं।
राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र शास्त्री कहते हैं कि वैसे तो इस मंच पर सभी विपक्षी नेताओं का जमावड़ा दिखा। लेकिन अरविंद केजरीवाल की अनुपस्थिति में सुनीता केजरीवाल की उपस्थिति इस विपक्षी मंच पर सबसे महत्वपूर्ण रही। उसके बाद अरविंद केजरीवाल की चिट्ठी को पढ़ कर उनकी सियासी पारी के आगाज का भी एक तरह से एलान कर दिया।
शास्त्री कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि आम आदमी पार्टी के दूसरे बड़े नेता इस मंच पर मौजूद नहीं थे, लेकिन विपक्ष के बड़े नेताओं ने जिस तरीके से सुनीता केजरीवाल का उल्लेख कर उनका कद बताया। वह साबित करता है कि आम आदमी पार्टी में अरविंद केजरीवाल के बाद अगर कोई बड़ी हैसियत की नेता हैं तो वो अब सुनीता केजरीवाल हैं।
हालांकि, सुनीता केजरीवाल ने रविवार को आयोजित लोकतंत्र बचाओ रैली से पहले कभी भी एक साथ बगैर अरविंद केजरीवाल के इतनी बड़ी रैली में देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं के साथ न कभी मंच साझा किया था और न भाषण दिया था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सुनीता केजरीवाल का बड़े नेताओं के साथ मंच साझा करना और भाषण देना उनकी पार्टी में उनके सियासी कद को तय कर गया।
राजनीतिक विश्लेषक श्रीधर सांवल कहते हैं कि वैसे तो आम आदमी पार्टी के सभी बड़े नेता अरविंद केजरीवाल की हिरासत का अपने स्तर पर विरोध कर रहे हैं। लेकिन जिस तरीके से सुनीता केजरीवाल ने लगातार जनता के बीच अरविंद केजरीवाल की हिरासत को लेकर भावनात्मक रूप से सामने आई उससे जनता के बीच में उनको लेकर एक भरोसा बढ़ा है। वह कहते हैं यह बात अलग है कि इस पूरे मामले के दौरान आम आदमी पार्टी की ओर से अरविंद केजरीवाल को ही अपना नेता माना गया। लेकिन सियासी गलियारोंमें सुनीता केजरीवाल की सक्रियता को देखते हुए अरविंद केजरीवाल के बाद नंबर दो की हैसियत का नेता घोषित किया जाने लगा। सांवल कहते हैं कि पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर मौजूद रहने वाली सुनीता केजरीवाल ने मजबूत एंट्री दर्ज की है।
सियासी जानकारों का कहना है जिस तरीके से बड़े सार्वजनिक मंच पर पहली बार सुनीता केजरीवाल ने भाषण दिया उससे उनकी एक तरह से राजनीतिक एंट्री कही जा सकती है। राजनीतिक विश्लेषक उपेंद्र शास्त्री कहते हैं कि भले ही सुनीता केजरीवाल मैं अरविंद केजरीवाल की चिट्ठी के तौर पर भाषण दिया हो। लेकिन उनका आत्मविश्वास इस बात को बताता है कि उनकी पार्टी ने अब अरविंद केजरीवाल के साथ सुनीता केजरीवाल को एक बड़े नेता के तौर पर देखना शुरू कर दिया है।
उनका कहना है कि अरविंद केजरीवाल की चिट्ठी के साथ जिस तरह पहली बार अरविंद केजरीवाल और अपनी बात के साथ पहली बार मंच पर बोलीं वह कम से कम आम आदमी पार्टी में भविष्य के एक नए और बड़े नेता के तौर पर देखी जा रहीं हैं। उपेंद्र कहते हैं कि अरविंद केजरीवाल की चिट्ठी के साथ फिलहाल सुनीता केजरीवाल की सियासत में एंट्री तो हो ही गई है।
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