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राजू बिष्ट
– फोटो : Social Media
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मणिपुर के गोरखा राजू बिष्ट को भाजपा ने अंतिम समय तक सभी समीकरणों पर विचार करने के बाद पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से टिकट दिया है। दार्जिलिंग राजू बिष्ट की ससुराल है और 2019 में उन्होंने यहां रिकॉर्ड चार लाख वोट से जीत दर्ज की थी। इस बार पूर्व विदेश सचिव हर्ष वर्धन शृंगला अपने गृह जनपद से सियासी शुरुआत करना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने जीत की प्रबल दावेदारी को तरजीह दी।
शृंगला के नाम के लिए भी पार्टी के अंदर काफी समर्थक थे। यही नहीं दिल्ली से उन्हें टिकट का आश्वासन भी लगभग मिल ही गया था, लेकिन बंगाल भाजपा के कार्यकर्ताओं की पसंद और बिष्ट की पिछले कार्यकाल में सक्रियता ने पार्टी को उन्हें ही प्रबल दावेदार बनाने के लिए बाध्य किया। दार्जिलिंग के नेताओं से तीन नाम मांगे गए थे, लेकिन उनकी ओर से सिर्फ एक ही नाम गया, राजू बिष्ट। पर्यवेक्षकों का मानना है कि जिला भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ पार्टी के सहयोगियों के बीच बिस्ट की लोकप्रियता ने संतुलन को उनके पक्ष में मोड़ दिया।
संघ में मजबूत पकड़
मणिपुर के कांगपोख में जन्मे 33 वर्षीय राजू बिष्ट सफल उद्यमी भी हैं। सूर्य रोशनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक भी हैं। इसके अलावा संघ परिवार में अच्छी पकड़ है। राजू 90 के दशक के अंत में संघ परिवार से जुड़े थे।
वादे पूरे नहीं होने के बावजूद लोकप्रिय
राजू बिष्ट निर्वतमान लोकसभा में दार्जिलिंग की आवाज बने और समय समय पर बंगाल के इस पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं को दिल्ली में उठाया। उनकी सक्रियता ऐसी थी, जैसी पहले किसी सांसद की नहीं रही। यही कारण है कि भाजपा के घोषणापत्र में दार्जिलिंग के लिए दो प्रमुख वादे पूरे नहीं होने के बावजूद राजू की लोकप्रियता में कमी नहीं आई। राजू ने कई मौकों पर अलग गोरखालैंड की भी मांग उठाई।
विरोध भी हुआ, करसियांग के भाजपा विधायक निर्दलीय मैदान में उतरे
जिला इकाई में समर्थन के बीच राजू को थोड़ा विरोध का भी सामना करना पड़ा। उनका टिकट पक्का होने के बाद क्षेत्र से करसियांग के विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा बागी हो गए और निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का एलान किया। शर्मा की दलील है कि किसी भूमिपुत्र को ही टिकट दिया जाना चाहिए, ना कि बाहरी को। वहीं गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के दार्जिलिंग विधायक नीरज जिम्बा ने राजू बिष्ट का समर्थन किया है।
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