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कुरालसी गांव में आयोजित पंचायत।
– फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव के रणक्षेत्र में जातीय समीकरण उलझ गए हैं। सदियों का इतिहास समेटे पश्चिम में 36 बिरादरी की सामाजिक पंचायतों की अहम भूमिका रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान पहली बार जातीय पंचायतों का सिलसिला ज्यादा जोर पकड़ रहा है। रोजाना समर्थन और विरोध की आवाजें गूंज रही हैं। राजनीतिक दलों के टिकट वितरण की बात भी पंचायतों में उठाई गई। सबके अपने सवाल हैं। टिकट की नाराजगी है तो कहीं विधानसभा चुनाव 2022 के नतीजों का असर।
वहीं, 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के समीकरण बनाने की जद्दोजहद भी दिख रही है। सम्राट मिहिर भोज प्रकरण भी हावी है। जातीय गणित में उलझे पश्चिम के हालात पर चुनाव डेस्क की रिपोर्ट…
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