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Ground Report Rampur : खानदानों की सियासत से आजाद मतदाता सिकंदर, इसलिए खुश हैं युवा वोटर

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Ground Report Rampur : खानदानों की सियासत से आजाद मतदाता सिकंदर, इसलिए खुश हैं युवा वोटर

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Ground Report Rampur: Voter free from the politics of dynasties.

रामपुर के अंबेडकर पार्क में लगी चुनावी चौपाल।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित लोकसभा सीट रामपुर में पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान होगा, जिसमें 17,31,836 मतदाता अपना नुमाइंदा चुनेंगे। दशकों बाद यह ऐसा चुनाव होगा जब नवाब खानदान और आजम खां के खानदान से कोई प्रत्याशी आमने-सामने नहीं होगा। ऐसे में अमर उजाला ने वोटिंग से सिर्फ तीन दिन पहले रामपुर सिटी से लेकर मिलक और स्वार तक मतदाताओं के मूड को समझने का प्रयास किया।

इसमें सबसे बड़ी बात यह रही कि चाहे जिस जाति-धर्म अथवा बिरादरी के वोटर हों, अपनी बात खुलकर रखते मिले। वह आजम खां नहीं, 2029 तक मुफ्त राशन की बात करते हैं। वे रामपुर शहर की शान बढ़ाते गेट को विकास नहीं मानते, उनकी नजर में तेजी से बन रहा बाईपास असली विकास की निशानी है। हालांकि, कई चुनाव में वोट डाल चुके और खेमों में रह चुके लोगों की नजर में धर्म, जाति और बिरादरी के नाम पर ध्रुवीकरण का खेल परदे के पीछे जारी है।

युवा बदलेंगे तस्वीर

रामपुर लोकसभा सीट पर इस बार 18 से 29 साल के बीच की उम्र के 4,35, 212 मतदाता हैं। ये युवा मतदाता कुल वोटर के एक चौथाई यानी 25 फीसदी से ज्यादा हैं। स्वार के उमर अली हों, मिलक के मोहम्मद उस्मान हों या फिर रामपुर के हरभजन सिंह, ये सभी इसी उम्र के उत्साही वोटर हैं। इन सबके पास पहले के विकास और आज के विकास की तुलना करने के लिए तर्क हैं। इनके पास अपने भविष्य को लेकर वोट करने की समझ है और हर योजना की जमीनी हकीकत की जानकारी है। ये नाम की राजनीति नहीं, मुद्दे की सियासत के पक्षधर हैं। ये कानून-व्यवस्था में सुधार के फायदे गिनाते हैं और रामपुर शहर की जेल रोड पर पसरे सन्नाटे का मतलब समझाते हैं। यही नहीं, ये वोट डालने के प्रति उत्साहित हैं और बार-बार कहते हैं कि सोच-समझकर ईवीएम का बटन दबाएंगे। यही समझ बड़े बदलाव का इशारा है।  

जमीनी हकीकत यह है … चुनावी रेस से बाहर आजम हैं… समाजवादी पार्टी नहीं

तकरीबन 26 साल के रवि कुमार रामपुर के एक स्टार होटल में कर्मचारी हैं। थोड़ा पढ़े-लिखे हैं और इसी शहर में रहकर ही पले-बढ़े हैं। इस बार जोर किसका है? इस सवाल के जवाब में वह मुस्कुरा देते हैं। कहते हैं ड्यूटी पर सियासी चर्चा नहीं कर सकते। लेकिन, रामपुर के युवा हैं तो सवाल दिल में उतरना लाजिमी है। किसी न किसी बहाने कमरे में तीन बार आए। हर उम्मीदवार के बारे में कुछ न कुछ अनछुआ पहलू बता गए। फिर विदा लेते हुए रवि ने जो बात बोली, वह सच्चाई के बहुत नजदीक लगती है।

  • वह कहते हैं- हमारे यहां आजम खां रेस से बाहर हैं, समाजवादी पार्टी नहीं। भाजपा और सपा में कांटे की टक्कर है। बसपा के उम्मीदवार को भी अच्छे वोट मिल सकते हैं। बाकी, आप स्वार और चमरौआ विधानसभा क्षेत्र में घूमकर आइए, दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। बापू मॉल में जाकर पब्लिक का मिजाज देख लीजिए, समझते देर न लगेगी कि टक्कर किसमें है।

  • समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मौलाना मोहिबुल्लाह भले दिल्ली की मस्जिद के इमाम हैं, लेकिन रामपुर के दो लाख से ज्यादा तुर्क मतदाता उनकी ताकत हैं। उन्होंने शनिवार को नूर महल जाकर कांग्रेस वेटरन बेगम नूरबानो से मुलाकात कर विपक्षी गठबंधन में एका होने का संदेश दिया। हालांकि उनका मुख्य मकसद मुस्लिम वोटों का बंटवारा रोकना था।  

 भाजपा का मास्टर स्ट्रोक…हमजा मियां को ले आए साथ  

मिलक के मैजिक अड्डे पर व्यवस्था संभाल रहे अमित का रोजाना सैकड़ों लोगों से पाला पड़ता है। अड्डे पर आने वालों की बात सुनते हैं और सियासी प्रतिक्रियाओं पर नजर रखते हैं। वह कहते हैं, जिस रामपुर सीट को बाहरी दुनिया मुश्किल मुकाबले वाली मान रही है, वहां के मतदाता अपने सांसद को चुनने के लिए मन बनाए बैठे हैं। यहां महिलाओं और युवाओं में वोटिंग को लेकर बहुत उत्साह है।

  • भाजपा की चिंता चुनाव से पहले यहां होने वाला ध्रुवीकरण है, जिसे रोकने के लिए कई विधायक, भाजपा के चुनाव प्रभारी और बड़े नेता लगे हैं। उनकी बात में दम दिखा, क्योंकि उनसे बातचीत के चंद घंटे बाद ही भाजपा ने रविवार को मास्टर स्ट्रोक चल दिया। 
  • इंडी गठबंधन के प्रत्याशी की बड़ी आस और इलाके में अच्छी साख रखने वाली पूर्व सांसद बेगम नूर बानो के पौत्र और पूर्व विधायक नवेद मियां के पुत्र नवाबजादा हैदर अली खान उर्फ हमजा मियां को भाजपा में शामिल करा पढ़े-लिखे मुस्लिम युवाओं को बड़ा संदेश पार्टी ने दे दिया है। इसी तरह, एक ब्लाॅक प्रमुख स्तर के मुस्लिम नेता को बाकायदा अल्पसंख्यक प्रधानों को घनश्याम लोधी के पक्ष में वोट करने के लिए राजी करने के काम पर लगाया गया है। 
  • भाजपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी एक तो पिछले उपचुनाव में आजम खान के नजदीकी को पराजित कर सांसद बने हैं, दूसरे हिंदू वोटों में सबसे ज्यादा लोधी वोटों पर उनकी पकड़ है। साथ ही, रामपुर शहर में आजम के वर्चस्व को चुनौती देकर भाजपा के विधायक बने आकाश सक्सेना जैसे कई एमएलए उनकी जीत के लिए पूरी ताकत से जुटे हैं।  

आजम के समर्थकों की नाराजगी ने जगाई बसपा की उम्मीद

रामपुर में चुनाव को त्रिकोणीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार जीशान खान। इलाके में लोगों के बीच सक्रिय रहने वाले जीशान को बसपा काडर के साथ समाजवादी पार्टी मुखिया से नाराज चल रहे आजम खां के समर्थकों से बहुत उम्मीद है। सपा के एक वर्तमान और पूर्व विधायक, एक पूर्व जिलाध्यक्ष जैसे बड़े नेता तो मुखर होकर बसपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट मांग रहे हैं।

  • मुस्लिम मतदाताओं के वोटिंग पैटर्न पर नजर रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि नूर बानो (कांग्रेस) और आजम खां (सपा) का कद बहुत बड़ा था। उनके मैदान में उतरने पर मुस्लिम वोट तुर्क और पठान में नहीं बंटता था। इसलिए इनकी जीत का अंतर बड़ा रहता था। लेकिन, इन दोनों सियासी रसूखवालों के सीन में नहीं होने से बसपा उम्मीदवार को पठान और दूसरे वोट मिल सकते हैं। दूसरी ओर, सपा के उम्मीदवार के पक्ष में तुर्क वोट पड़ेंगे। इसीलिए मुकाबला रोचक होता दिख रहा है।

ये हैं समर के योद्धा

  • घनश्याम लोधी, भाजपा : पहले सपा में थे और आजम खां के करीबियों में गिने जाते थे। लोकसभा उपचुनाव में आजम खां के दाहिना हाथ कहे जाने वाले आसिम रजा को हराकर बड़ा उलटफेर किया। सवा लाख के करीब लोधी मतदाताओं पर उनकी पैठ है। पूर्व सांसद नूरबानो के पौत्र हमजा के भाजपा में आने से मजबूत स्थिति में हैं।
  • मौलाना मोहिब्बुुल्लाह नदवी, सपा : रामपुर के मूल निवासी और दिल्ली की प्रतिष्ठित मस्जिद के इमाम हैं। यहां के करीब 2 लाख तुर्क मतदाता मौलाना और अखिलेश दोनों के साथ दिख रहे हैं। बंटवारा पठान और दूसरे मुस्लिम वोटों में हो सकता है, पर इसकी संभावना कम ही है। यही नदवी की ताकत है।
  • जीशान खान, बसपा : बड़े सियासी फलक पर जीशान की पहली बार सियासी दस्तक है। प्राॅपर्टी डीलिंग का काम करने वाले जीशान को सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और आजम समर्थक रसूखदार सपाइयों का साथ मिलने से वह अब रेस में दिखने लगे हैं। क्षेत्र में पठान वोट एक लाख से ज्यादा हैं, जिससे उनको उम्मीद है।

पांच विधानसभा क्षेत्रों में से 4 में एनडीए व एक सपा का विधायक 

पिछले दो चुनावों के परिणाम 

2022 उपचुनाव : घनश्याम लोधी, भाजपा

मत : 3.67 लाख, वोट शेयर : 52% 

2019 आम चुनाव : विजेता : आजम खां, सपा

मत : 5.59 लाख। वोट शेयर: 52.71% 

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