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UP Lok Sabha Election 2024
– फोटो : अमर उजाला
शहजादे… शहंशाह…मंगलसूत्र… आरक्षण… झूठ की मशीन…। कुछ इस तरह के विशेषणों के इर्द-गिर्द चुनाव सिमटता जा रहा है। पहले चरण में जहां पार्टियों ने अपने घोषणापत्रों के जरिये जनता के मुद्दे उठाए, वहीं चुनावी रथ के तीसरे चरण में पहुंचते ही जुबानी जंग शबाब पर पहुंच गई। इन सबके बीच जनता के मुद्दे दरकिनार हो गए हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने सपा-कांग्रेस पर आतंकियों-माफिया का महिमामंडन करने का आरोप लगाया, तो पूर्व सीएम अखिलेश यादव अपनी सभाओं में भाजपा पर आरक्षण में बदलाव करने का आरोप लगा रहे हैं।
चुनाव प्रचार के शुरुआती दिनों में जनसुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर, बेरोजगारी, कल्याणकारी योजनाओं, महिलाओं, किसानों व युवाओं की तरक्की के सवाल सबने अपने-अपने ढंग से प्रमुखता से उठाए। मुफ्त इलाज से लेकर आटा-डाटा फ्री जैसे वादे भी सामन आए। पर, आहिस्ता-आहिस्ता इन मुद्दों का स्थान जुबानी जंग ने ले लिया।
विरासत कर का भी रहा शोर
ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने संसाधनों के समान वितरण के लिए विरासत कर जैसी नीतियों की पैरोकारी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे तत्काल मध्य वर्ग का बड़ा मुद्दा बनाते हुए महिलाओं के मंगलसूत्र छिनने और चार कमरे के फ्लैट में से दो कमरे लेकर दूसरे को दिए जाने से जोड़ दिया।
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