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Flashback : राजधानी की सियासत में रही गांवों की धमक, दिल्ली को दिए दो मुख्यमंत्री; केंद्रीय मंत्री भी बने

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Flashback : राजधानी की सियासत में रही गांवों की धमक, दिल्ली को दिए दो मुख्यमंत्री; केंद्रीय मंत्री भी बने

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Flashback: Villages remain a big point in the politics of delhi

साहिब सिंह वर्मा और चौधरी ब्रह्मप्रकाश
– फोटो : अमर उजाला

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राजधानी के गांवों की सियासत में हमेशा धमक रही है। यहां के नेताओं ने केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री पद तक की जिम्मेदारी निभाई है। कई नेताओं ने निगम से लेकर संसद तक पहुंच बनाई है। इस बार भी दिल्ली देहात के तीन प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। दिलचस्प बात यह कि मुंडका गांव के सात नेताओं की 16 बार अलग-अलग पदों के लिए ताजपोशी हुई है। इसी गांव के साहिब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने के साथ केंद्रीय मंत्री भी बने थे, जबकि दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे चौधरी ब्रह्म प्रकाश का नाता शकूरपुर गांव से था।

इस बार दक्षिणी दिल्ली के दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी गांवों से ही हैं। भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह बिधूड़ी तुगलकाबाद गांव के रहने वाले हैं, जबकि आप प्रत्याशी सहीराम का निवास तेहखंड गांव में है। पश्चिमी दिल्ली की भाजपा प्रत्याशी कमलजीत सहरावत अंबराई गांव की बहू हैं। तीनों ग्रामीण पृष्ठभूमि के दम पर ही संसद में पहुंचने की कोशिश में हैं। यही वजह है कि गांवों में जाने पर इनके प्रचार का तरीका पूरी तरह वहीं का हो जाता है। बता दें कि दिल्ली में करीब 360 गांव हैं। गांव की गलियों में आसानी से हरियाणवी अल्हड़पन और मौज-मस्ती नजर आ जाती है। यूपी व बिहार से आकर गांवों में किराये रहने वाले लोग भी कुछ हद तक इनके रंग में रंगे हुए हैं।

चौधरी ब्रह्म प्रकाश की जमी सियासत

शकूरपुर के चौधरी ब्रह्म प्रकाश भी मुख्यमंत्री बनने के अलावा केंद्रीय मंत्री भी बने। इसके अलावा शाहपुर जट गांव के चौधरी दिलीप सिंह, निलोठी गांव के चौधरी भरत सिंह और सुल्तानपुर माजरा के चौधरी तारीफ सिंह संसद तक पहुंचने में कामयाब रहे।

विकास की चमक से दूर गांव

नेता भले ही संसद तक पहुंचे, लेकिन गांव अभी तक विकास की चमक से दूर हैं। समस्याएं यहां हर कदम पर खड़ीं हैं। टूटी सड़कें व उखड़ी गलियों से गुजरते वक्त इसे देखा भी जा सकता है। साफ-सफाई व्यवस्था भी खराब है। खेल मैदान भी जर्जर हालत में हैं। इन समस्याओं से परेशान कटेवड़ा गांव के लोगों ने निगम चुनाव का बहिष्कार भी कर दिया था। इससे पहले भी मांगों को लेकर अलग-अलग गांवों से वोट न देने की बात हो चुकी है।

मुंडका की दिल्ली में खास सियासी पहचान

वर्ष 1977 से लगातार मुंडका के लोग जनप्रतिनिधि चुने जा रहे हैं। क्षेत्र भले ही कोई दूसरा रहा हो। पिछले 47 सालों में साहिब सिंह वर्मा दो बार पार्षद एक बार विधायक के साथ दिल्ली में मंत्री व मुख्यमंत्री बने। सांसद बनने पर केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी निभाई। पुत्र प्रवेश वर्मा एक बार विधायक व दो बार सांसद चुने गए। एससी वत्स एक बार महानगर पार्षद व तीन बार विधायक रहे। इसी गांव के धर्मपाल लाकड़ा विधायक हैं। आजाद सिंह दो बार पार्षद बने। इसमें उपमहापौर व महापौर का पद भी संभाला। अनिल एक बार पार्षद चुने गए और वह नेता विपक्ष भी रहे। सुनील कुमारी भी एक बार पार्षद चुनी गई।

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