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नई दिल्ली. रनों का यह ‘महारिकॉर्ड’ बनाना शायद ग्राहम गूच (Graham Gooch) की तकदीर में लिखा था. उनके नाम एक टेस्ट में सर्वाधिक रन का विश्वरिकॉर्ड (दोनों पारियों को मिलाकर) दर्ज है. गूच के बाद विश्व क्रिकेट ने ब्रायन लारा, विराट कोहली, स्टीव स्मिथ, जो रूट और केन विलियमसन जैसे मशहूर बैटरों के खेल कौशल का दीदार किया लेकिन इंग्लैंड के इस स्टाइलिश ओपनर का रिकॉर्ड अब तक टूट नहीं सका है. लगता नहीं कि निकट भविष्य में भी यह टूट सकेगा.
डेब्यू टेस्ट में ‘पेयर’ (दोनों पारियों में 0) बनाने वाले बैटर के करियर का यह ‘शीर्ष बिंदु’ था. खास बात यह है कि ‘क्रिकेट का मक्का’ कहा जाने वाले लॉर्ड्स मैदान इस रिकॉर्ड का गवाह बना था और इस मैच में वे इंग्लैंड टीम (England Cricket Team) के कप्तान भी थे. गूच ने 26 से 31 जुलाई के बीच भारत के खिलाफ (India Vs England) इस टेस्ट में पहली पारी में 333 रन (43 चौके और तीन छक्के) और दूसरी पारी में 123 रन (13 चौके और 4 छक्के) बनाए थे. टेस्ट की दोनों पारियों में कुल मिलाकर उनके बैट से 456 रन निकले थे जो किसी सिंंगल टेस्ट में एक बैटर की सबसे बड़ी रनसंख्या है.
टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में में वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा 400* और ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू हेडन 380 रन का विशाल स्कोर बना चुके हैं लेकिन गूच के इस रिकॉर्ड को वे भी नहीं तोड़ सके हैं. किसी एक टेस्ट में सर्वाधिक रन (Most runs in a test match) बनाने के मामले में गूच के बाद ऑस्ट्रेलिया के बाएं हाथ के ओपनर मार्क टेलर का नंबर आता है जिन्होंने अक्टूबर 1998 में पाकिस्तान के खिलाफ पेशावर टेस्ट में 426 रन (पहली पारी में 334* और दूसरी पारी में 92) बन बनाए थे. यही नहीं, गूच इस मैच में एक टेस्ट में तिहरा शतक और शतक बनाने वाले दुनिया के पहले बैटर बने थे. टेस्ट क्रिकेट में अब तक दो बैटर ही यह कारनामा कर सके हैं. फरवरी 2014 में श्रीलंका के कुमार संगकारा ने बांग्लादेश के खिलाफ चिटगांव टेस्ट में पहली पारी में 319 और दूसरी पारी में 105 रन बनाकर गूच की इस उपलब्धि की बराबरी की थी.
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महंगा पड़ा था मोरे का ‘कैच ड्रॉप’
गूच की 333 की पारी की बात करें तो इंग्लैंड का यह ओपनर जब 36 रनों पर था तब विकेटकीपर किरण मोरे ने उनका आसान सा कैच छोड़ दिया था. बदकिस्मत गेंदबाज थे संजीव शर्मा. गूच का यह कैच टीम इंडिया को बहुत महंगा पड़ा था. उनके 333 रन की बदौलत इंग्लैंड टीम पहली पारी में 4 विकेट पर 653 रन (पारी घोषित) का स्कोर बनाने और बाद में यह टेस्ट भी जीतने में सफल हो गई थी. पहली पारी के तिहरे शतक के बाद आत्मविश्वास से भर चुके गूच ने टेस्ट की दूसरी पारी में भी शतक जड़ा था और अपनी बैटिंग से भारतीय टीम की नाक में दम कर दिया था.

डेब्यू टेस्ट में दोनों पारियों में खेल पाए थे सिर्फ 10 गेंद
इंग्लैंड के बेहतरीन बैटरों में से एक गूच के करियर का आगाज निराशाजनक रहा था. 22 साल के गूच ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बर्मिंघम में जुलाई 1975 में टेस्ट करियर का आगाज किया और दोनों पारियों में 0 पर आउट हुए थे. डेनिस लिली, जेफ थॉमसन और मैक्स वॉकर की तेज गेंदबाजी तिकड़ी के आगे वे तमाम तरह की मुश्किल में दिखे और पहली पारी में 3 और दूसरी पारी में 7 गेंदें ही खेल सके थे. एक और मैच में खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. किसी युवा बैटर का मनोबल तोड़ने के लिए इससे खराब डेब्यू नहीं हो सकता लेकिन गूच ने इसे भुलाकर जूझने का माद्दा दिखाया. डोमिस्टक क्रिकेट में वापसी करते हुए उन्होंने रनों का अंबार लगाया और 1978 में फिर टीम में चुनने के लिए सिलेक्टर्स को मजबूर कर दिया. करियर के तीसरे टेस्ट में 54 रनों की पारी हौसला बढ़ाने वाली रही लेकिन पहले टेस्ट शतक के लिए उनको 5 साल इंतजार करना पड़ा.
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दक्षिण अफ्रीका का दौरा करने पर लगा बैन
21 टेस्ट के बाद उन्होंने पहला टेस्ट शतक बनाया. जून 1980 में उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ लॉर्ड्स में 17 चौकों और एक छक्के की मदद से 123 रनों की पारी खेली. छह माह बाद इंग्लैंड टीम के इंडीज दौरे में वे टीम के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बैटर रहे. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. बैटिंग में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें विज्डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया. गूच का करियर रफ्तार पकड़ रहा था लेकिन तभी उन्होंने 1982 में ऐसा फैसला लिया जिसने क्रिकेटप्रेमियों की निगाह में उन्हें ‘विलेन’ बना दिया. रंगभेद के कारण विश्व क्रिकेट से बहिष्कृत दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर जाने वाली टीम की उन्होंने अगुवाई की. इस कारण गूच को तीन साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया. बाद में एक डॉक्यूमेंट्री में गूच ने आरोप लगाया था कि उन्हें दक्षिण अफ्रीका के टूर के लिए मजबूर किया था और कुछ प्रभावी लोगों ने उन्हें ऐसा नहीं करने पर ‘गंभीर परिणाम’ की धमकी दी थी.
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34 टेस्ट और 50 वनडे में टीम के कप्तान रहे
1985 में गूच ने फिर इंग्लैंड टीम में वापसी की और बाद में टीम की कप्तानी भी संभाली. तीन हिस्सों में बंटे 20 साल के इंटरनेशनल करियर के दौरान उन्होंने 118 टेस्ट और 125 वनडे मैच खेले. टेस्ट क्रिकेट में 20 शतक की मदद से 8900 (औसत 42.58) और वनडे में आठ शतकों की मदद से 4290 रन (औसत 36.98) रन उन्होंने बनाए. टेस्ट में एक तिहरा और एक दोहरा शतक उनके नाम पर दर्ज है. 34 टेस्ट और 50 वनडे मैचों में वे इंग्लैंड टीम के कप्तान भी रहे. मध्यम गति के बॉलर के रूप में उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 246 और लिस्ट ए मैचों में 310 विकेट लिए. यही नहीं, इंग्लैंड की ओर से टेस्ट खेलते हुए वे एक ही मैच में बैटिंग और बैटिंग की शुरुआत कर चुके हैं.
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क्रिकेट में 200 शतक बनाए
छह फीट लंबे इस क्रिकेटर ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 581 मैचों में 44,846 रन और 613 लिस्ट ए मैचों में 22,211 रन बनाए. फरवरी 1995 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट के रूप में अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेलने वाले गूच ने 2000 तक फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलना जारी रखा. क्रिकेट में कुल 200 शतक गूच के नाम पर हैं जिसमें टेस्ट के 20, वनडे के 8, फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 128 और लिस्ट ए मैचों के 44 शतक शामिल हैं.
Tags: Cricket, England cricket team, Graham Gooch, India Vs England, Test cricket
FIRST PUBLISHED : May 17, 2024, 16:25 IST
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