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Amit Shah: ‘इस देश को फिर कभी नहीं बांटा जा सकता’, उत्तर बनाम दक्षिण के विवाद पर शाह की सख्त टिप्पणी

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Amit Shah: ‘इस देश को फिर कभी नहीं बांटा जा सकता’, उत्तर बनाम दक्षिण के विवाद पर शाह की सख्त टिप्पणी

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अमित शाह
– फोटो : अमर उजाला

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हाल ही में बीआरएस नेता केटी रामाराव ने अपने एक बयान में उत्तर बनाम दक्षिण के मुद्दे पर बात की और दक्षिण को अलग देश बताया। अब एक ताजा इंटरव्यू में अमित शाह ने केटी रामाराव के उस बयान पर तीखी टिप्पणी की और बीआरएस नेता के बयान को घोर आपत्तिजनक बताया। 

दक्षिण को अलग देश बताना घोर आपत्तिजनक

अमित शाह ने कहा ‘इस देश को फिर कभी नहीं बांटा जा सकता। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा था कि उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग कर देना चाहिए, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इस बयान से दूरी बना ली। देश की जनता को कांग्रेस के एजेंडे के बारे में सोचना चाहिए। अगर कोई कहता है कि दक्षिण एक अलग देश है तो ये बेहद आपत्तिजनक है।’ केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ‘भाजपा दक्षिण के पांच राज्यों- केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है।’

क्या कहा था केटी रामाराव ने

बीआरएस नेता केटी रामाराव ने बीते हफ्ते अपने एक बयान में कहा था कि उत्तर भारत अपने आप में अलग देश है। यह एक अलग दुनिया है। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि यह पूरी तरह से अलग है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर यह अलग देश है। मुझे लगता है कि यहां दक्षिण के मुकाबले अलग मुद्दे हैं। लोग अलग सोचते हैं। यही वजह है कि भाजपा दक्षिण में अपनी जगह नहीं बना पा रही है।’

‘उत्तर के राज्यों से बहुत आगे हैं दक्षिणी राज्य’

बीआरएस नेता ने प्रति व्यक्ति आय पर बात करते हुए कहा कि ‘तेलंगाना में प्रति व्यक्ति आय 357 रुपये है, जो कि उत्तर भारत के राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा है। केटी रामाराव ने कहा कि बिहार में ये 57 रुपये और उत्तर प्रदेश में 87 रुपये के करीब है। ये उनकी (उत्तर भारत) सरकारों की कमी है कि वे अच्छा प्रशासन नहीं दे पा रही हैं। उनकी प्राथमिकताएं गलत जगह पर हैं, वे अपने लोगों को पिछड़ा बनाए रखना चाहते हैं और वोट लेने के लिए उनकी भावनाओं से खेलते हैं। दक्षिण में ऐसा नहीं है, यहां असल मुद्दों पर फोकस रहता है।’ केटी रामाराव ने कहा कि ‘आधारभूत ढांचे, शिक्षा और साक्षरता दर और स्वास्थ्य सूचकांक आदि सभी जगह दक्षिण के राज्य अन्य राज्यों से बहुत आगे हैं, खासकर हिंदी पट्टी के राज्यों से।’ 

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