Home World इब्राहिम रईसीः ईरान के राष्ट्रपति और सुप्रीम लीडर में क्या है फर्क? अयातोल्लाह खामेनेई के सामने कैसी चुनौती

इब्राहिम रईसीः ईरान के राष्ट्रपति और सुप्रीम लीडर में क्या है फर्क? अयातोल्लाह खामेनेई के सामने कैसी चुनौती

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इब्राहिम रईसीः ईरान के राष्ट्रपति और सुप्रीम लीडर में क्या है फर्क? अयातोल्लाह खामेनेई के सामने कैसी चुनौती

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Raisi helicopter crash: हेलीकॉप्टर दुर्घटना में ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत की पुष्टि के बाद यह सवाल उठने लगा है कि उनका अगला उत्तराधिकारी कौन होगा. इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई की क्या भूमिका होती है और वह ईरान के कार्यवाहक राष्ट्रपति किसे चुनेंगे. क्योंकि इब्राहिम रईसी ना सिर्फ ईरान के राष्ट्रपति थे बल्कि वह खामेनई के उत्तराधिकारी के भी प्रबल दावेदार थे. 

ईरान के राष्ट्रपति की गिनती मिडिल ईस्ट देशों के अहम शक्तिशाली पदों में से एक में होती है. ऐसे में इब्राहिम रईसी की मौत का असर मिडिल ईस्ट देशों के भविष्य पर भी पड़ेगा. हालांकि, ईरान में राष्ट्रपति पद से ऊपर भी एक पद है जिसे सुप्रीम लीडर कहा जाता है. देश के सभी मामलों में फैसला लेने का अंतिम अधिकार सुप्रीम लीडर के पास ही होता है. आइए जानते हैं कि ईरान के राष्ट्रपति और सुप्रीम लीडर में क्या फर्क है.

सुप्रीम लीडर और राष्ट्रपति के बीच क्या अंतर है?

सुप्रीम लीडर जिसे शिया इस्लामी धर्मशास्त्र में वेलायत-ए फकीह के नाम से भी जाना जाता है. सुप्रीम लीडर ही ईरान में अंतिम शासक होता है और देश से संबंधित सभी प्रमुख निर्णय लेने का अंतिम अधिकार उसी का होता है. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान में सुप्रीम लीडर पद की व्यवस्था की गई थी. सुप्रीम लीडर ही ईरान का प्रमुख और कमांडर इन चीफ होता है.

सुप्रीम लीडर बनने की पहली शर्त यह है कि सिर्फ पुरुष ही इस पद पर आसीन हो सकता है. ईरान में जिस प्रकार का इस्लामी कानून है, उसके अनुसार सुप्रीम लीडर के पद पर केवल एक उच्च रैंक वाले शिया धर्मशास्त्री ही बैठ सकता है जो कम से कम अयातुल्ला के पद के लायक हो या अयातुल्ला के पद हो. हालांकि, यह शर्त काफी विवादित है क्योंकि हमेशा यह सवाल उठते रहे हैं कि क्य खमेनेई खुद कभी उस स्तर तक पहुंचे थे?

ईरान के राष्ट्रपति पद की बात की जाए तो यह देश की कार्यकारी शाखा का प्रमुख होता है. हर चार साल में चुनावी प्रक्रिया के द्वारा राष्ट्रपति चुना जाता है. राष्ट्रपति सरकार को नियंत्रित करता है. राष्ट्रपति अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि और ताकत के आधार पर देश की नीति और अर्थव्यवस्था में भी काफी अहम भूमिका निभाता है.

सुप्रीम लीडर के सामने क्या है चुनौती?

ईरानी संविधान के अनुच्छेद 131 में कहा गया है कि यदि पद रहते हुए किसी ईरानी राष्ट्रपति की मौत होती है तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभाता है. हालांकि, वह इस जिम्मेदारी को तभी संभालेगा जब सुप्रीम लीडर इसकी उस पद को संभालने की अनुमति दे. वर्तमान परिस्थिति में ईरान में ऐसे कई शक्तिशाली नेता हैं जो इस पद के लिए खुद को पेश करेंगे. ऐसे में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई के शासन की भी परीक्षा होगी. क्योंकि इब्राहिम रईसी को खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा था. ऐसे में जो भी नेता ईरान का राष्ट्रपति बनेगा उसे अप्रत्क्ष रूप से सुप्रीम लीडर का भी दावेदार मान लिया जाएगा.

 यही कारण है कि सुप्रीम लीडर खामेनेई ने सरकार की स्थिरता को लेकर लोगों की चिंता को दूर करने के एक प्रयास में रविवार शाम को रईसी की मौत की पुष्टि से पहले ही उन्होंने सोशल मीडया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सरकार चलाने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आने वाली है.

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