Home Breaking News Khabron Ke Khiladi: पार्टियों के दावों के बीच विश्लेषकों ने बताए अनुमान, खबरों के खिलाड़ी बता रहे इनके मायने

Khabron Ke Khiladi: पार्टियों के दावों के बीच विश्लेषकों ने बताए अनुमान, खबरों के खिलाड़ी बता रहे इनके मायने

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Khabron Ke Khiladi: पार्टियों के दावों के बीच विश्लेषकों ने बताए अनुमान, खबरों के खिलाड़ी बता रहे इनके मायने

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Khabron Ke Khiladi: political parties claims of victory in Lok Sabha elections know analysts predictions

खबरों के खिलाड़ी।
– फोटो : अमर उजाला

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लोकसभा चुनाव के बीच अलग-अलग पार्टियां अपनी जीत के दावे कर रही हैं। इसके साथ ही ये पार्टियां किस पार्टी को कितनी सीट मिलने जा रही हैं, इसका भी आंकड़ा दे रही हैं। पार्टियों के दावे-प्रतिदावे के बीच चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर और पूर्व सैफोलॉजिस्ट योगेंद्र यादव ने भी अपने-अपने आंकड़े दिए हैं और उनका आधार बताया है। दोनों के आंकड़े इस वक्त चर्चा का विषय हैं। इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में इन्हीं दावों और आंकड़ों को लेकर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, अवधेश कुमार और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। 

विनोद अग्निहोत्री: योगेंद्र यादव और प्रशांत किशोर के दावे अहम हैं। योगेंद्र यादव सैफोलॉजिस्ट रहे हैं। उनकी पहचान सत्ता विरोधी के तौर पर रही है। इसी तरह प्रशांत किशोर की बात करें तो भाजपा से लेकर ममता बनर्जी, जगनमोहन रेड्डी समेत तमाम दलों के लिए रणनीतिकार का काम कर चुके हैं। योगेंद्र यादव हर चरण के बाद सीटों का आकलन कर रहे हैं। उसकी सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है। पांच चरण के बाद उनका आकलन भाजपा के लिए 250 के आसपास है। वहीं, दूसरी तरफ प्रशांत किशोर कह रहे हैं कि भाजपा को 300 के आसपास सीटें मिल सकती हैं।   

समीर चौगांवकर: जब प्रधानमंत्री ने 400 से पार का टारगेट सेट किया था, तब भी भाजपा जानती थी कि जब 370 की तैयारी करेंगे, तब जाकर पिछली बार 303 से ऊपर 325, 330 या 335 के आसपास जाकर रुकेंगे। जिस तरह से अलग-अलग राज्यों में भाजपा ने छोटे-छोटे दलों को जोड़ा, उससे उनकी स्थिति मजबूत हुई। वहीं, विपक्ष में सीटों के बंटवारे को लेकर कई राज्यों में खींचतान दिखाई दी। इसके बाद भी विपक्ष ने भाजपा की मजबूत स्थिति को कम करने की अच्छी कोशिश की है।

पूर्णिमा त्रिपाठी: दावे तो दावे होते हैं, उनमें दम नहीं होता है। जिन राजनीतिक विश्लेषकों की बात हो रही है, वो पूरी तरह निष्पक्ष हैं, यह भी नहीं कहा जा सकता है। ऐसे में उनके आंकड़ों पर भी पूरी तरह से यकीन करना मुश्किल है। शुरुआत में जिस तरह से विपक्ष को खारिज किया जा रहा था, वो स्थिति अब नहीं दिखाई देती है। छह चरण के चुनाव के बाद विपक्ष ने जो आत्मविश्वास दिखाया है, उससे लगता है कि मामला एकतरफा तो नहीं है। 

अनुराग वर्मा: प्रशांत किशोर या योगेंद्र यादव बात करें तो माना यह जाना चाहिए यह निष्पक्ष होंगे, लेकिन ऐसा नहीं होता है। जिसकी जो विचारधारा होती है, उसे दुनिया वैसी ही दिखती है। जिस तरह का बेमेल गठबंधन हुआ है, उसे हमारा समाज इतनी बार देख चुका है कि मुझे नहीं लगता है कि इसका कोई खास असर चुनाव पर पड़ेगा। जहां तक 400 की बात है तो संगठन को उत्साहित करने के लिए इस तरह का नंबर दिया जाता है। 

अवधेश कुमार: मैं बहुत ज्यादा दूसरों के आंकड़े पर नहीं जाता हूं। मैं खुद अपने आंकड़े देता हूं। राज्यवार देखिए तो यह देखना पड़ेगा कि भाजपा की कमी कहां हो रही है। अगर हो रही है तो क्या कहीं से बढ़ रही है और बढ़ रही है तो कहां बढ़ रही है। मेरे हिसाब से सरकार के काम की वजह से वोट कंसॉलिडेट हुआ है।

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