Home Breaking News सियासत: ‘मुख्यमंत्री पद को लेकर NCP 2004 में ही दो फाड़ हो जाती’, चाचा शरद पवार के दावे को अजित ने बताया झूठ

सियासत: ‘मुख्यमंत्री पद को लेकर NCP 2004 में ही दो फाड़ हो जाती’, चाचा शरद पवार के दावे को अजित ने बताया झूठ

0
सियासत: ‘मुख्यमंत्री पद को लेकर NCP 2004 में ही दो फाड़ हो जाती’, चाचा शरद पवार के दावे को अजित ने बताया झूठ

[ad_1]

Ajit Pawar termed Sharad Pawar claim NCP would have divided over CM post in 2004 as a complete lie

शरद पवार और अजित पवार
– फोटो : एएनआई

विस्तार


महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार ने अपने चाचा और एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार पर निशाना साधा। उन्होंने शरद के उस दावे को सरासर झूठ बताया, जिसमें कहा था कि यदि उन्होंने मुख्यमंत्री पद के लिए दांव लगाया होता तो अविभाजित पार्टी 2004 में विभाजित हो गई होती।

अजित पवार ने सोमवार को अपने नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, वह और वरिष्ठ नेता छगन भुजबल, सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल चाहते थे कि 2004 में एनसीपी (अविभाजित) को सीएम पद मिले।

बता दें कि 1999 और 2014 के बीच कांग्रेस और अविभाजित एनसीपी ने संयुक्त रूप से महाराष्ट्र सरकार चलाई, जिसमें मुख्यमंत्री हमेशा कांग्रेस का रहा। जबकि, दोनों दलों के बीच सहमति के चलते उप-मुख्यमंत्री का पद आमतौर पर राकांपा के पास रहा। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार द्वारा मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश नहीं करने पर निराशा व्यक्त की थी।

2004 में एनसीपी (अविभाजित) ने कांग्रेस से अधिक सीटें जीतीं 

दिलचस्प बात यह है कि 2004 के विधानसभा चुनाव में एनसीपी (अविभाजित) ने 288 सदस्यीय सदन में अपनी सहयोगी कांग्रेस (69) की तुलना में अधिक सीटें (71) जीती थीं। हालांकि, 1999 में कांग्रेस को विभाजित करने के बाद, शरद पवार ने कांग्रेस को सीएम पद की पेशकश की और अपनी पार्टी के लिए राज्य के साथ-साथ केंद्र में भी अधिक कैबिनेट विभाग हासिल किए।

शरद ने 2004 में पार्टी नेतृत्व को बताया था अनुभवहीन

शरद ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि एनसीपी (अविभाजित) 2004 में ही विभाजित हो गई होती। इस दौरान उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भी अनुभवहीन बताया था। उनके इस दावे से पता चलता है कि मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार थे।

इस मुद्दे पर पहली बार अजित पवार ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा, उनका मानना था कि छगन भुजबल को 2004 में शीर्ष पद के लिए चुना जाएगा, क्योंकि, 1999 में एनसीपी के गठन के बाद, उन्होंने राज्य के सभी कोनों में पार्टी का प्रसार किया। कोई भी इससे इन्कार नहीं कर सकता, क्योंकि हम सभी उनके प्रयासों के गवाह रहे हैं।

सीएम पद के लिए विधायकों ने पाटिल का किया था समर्थन

अजीत पवार ने ‘अनुभवहीन नेतृत्व’ के दावे पर कहा, 1991 में, जब राकांपा कांग्रेस से अलग नहीं हुई थी, तब शरद पवार को दिल्ली जाना पड़ा, क्योंकि उन्हें रक्षा विभाग दिया गया था। विधायकों ने सर्वसम्मति से शरद पवार के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए पदमसिंह पाटिल का समर्थन किया था। उस समय सीएम पद के लिए सुधाकरराव नाइक का नाम प्रस्तावित ही नहीं किया गया था। 

अजित के मुताबिक, सुधाकरराव नाइक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। शरद पवार के रक्षा मंत्री बनने के बाद नाइक मुख्यमंत्री बने तो हमने उनके अधीन काम किया। 15 साल बाद 2004 में हम अनुभवहीन कैसे हो सकते हैं। सीएम पद स्वीकार न करने का मामला कभी नहीं था। बता दें कि अजित पवार ने जुलाई 2023 में एनसीपी को तोड़ दिया था। वह शिवसेना और बीजेपी की महायुति सरकार में शामिल हो गए।



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here