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SYL Canal: प्रकाश बादल और सुखबीर बादल को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही की बंद

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SYL Canal: प्रकाश बादल और सुखबीर बादल को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना कार्यवाही की बंद

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सुप्रीम कोर्ट ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मुद्दे से जुड़े मामले में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे और पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी है। न्यायमूर्ति एस के कौल, न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ के समक्ष यह मामला मंगलवार को सुनवाई के लिए आया। 

पीठ ने कहा कि राजनीतिक व्यवस्थाओं द्वारा दिए गए कुछ बयानों को ध्यान में रखते हुए कहा गया था कि शीर्ष अदालत को स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमने मामले को मध्यस्थता के साथ निपटाने के लिए भेजा है। यदि जरूरी हुआ तो अदालत आदेश पर अमल करेगी। अगर इस अदालत को लगता है कि स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना की कुछ कार्यवाही शुरू की जानी है, तो वह फैसला करेगी। 

बादल पिता-पुत्र ने कहा था, सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू नहीं होने देंगे 
अदालत ने कहा कि  इन सभी मकसदों के लिए हमें नहीं लगता है कि आवेदक की सहायता की आवश्यकता होगी। तदनुसार अवमानना कार्यवाही बंद की जाती है और अवमानना नोटिस को खारिज किया जाता है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने बयान दिए थे कि वे एसवाईएल मामले में सर्वोच्च अदालत के फैसले को लागू नहीं होने देंगे। इससे पहले केंद्र ने मंगलवार को सर्वोच्च अदालत में कहा था कि पंजाब सरकार दशकों पुराने एसवाईएल नहर विवाद को सुलझाने में सहयोग नहीं कर रही है।

शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि पानी एक प्राकृतिक संसाधन है और जीवित प्राणियों को इसे साझा करना सीखना चाहिए। उसने कहा कि पक्षकारों को व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उसने परियोजना को लेकर हिंसा की कभी-कभी होने वाली घटनाओं का स्पष्ट जिक्र करते हुए कहा कि सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर पक्षकारों को बातचीत करके समाधान निकालने के प्रभाव और जरूरत को समझना होगा। पंजाब के वकील ने पीठ से कहा कि राज्य सरकार इस मसले को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने की इच्छुक है।

केंद्र की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुनवाई की शुरुआत में पीठ से कहा कि शीर्ष अदालत ने 2017 में कहा था कि इस मसले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए और भारत संघ, जल संसाधन मंत्रालय के माध्यम से, सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के उद्देश्य से हरियाणा और पंजाब राज्यों को एक साथ लाने का प्रयास कर रहा है। वेणुगोपाल ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि पंजाब सहयोग नहीं कर रहा। 2020 और 2021 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र भेजे गए थे, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।

 

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मुद्दे से जुड़े मामले में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे और पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी है। न्यायमूर्ति एस के कौल, न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ के समक्ष यह मामला मंगलवार को सुनवाई के लिए आया। 

पीठ ने कहा कि राजनीतिक व्यवस्थाओं द्वारा दिए गए कुछ बयानों को ध्यान में रखते हुए कहा गया था कि शीर्ष अदालत को स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमने मामले को मध्यस्थता के साथ निपटाने के लिए भेजा है। यदि जरूरी हुआ तो अदालत आदेश पर अमल करेगी। अगर इस अदालत को लगता है कि स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना की कुछ कार्यवाही शुरू की जानी है, तो वह फैसला करेगी। 

बादल पिता-पुत्र ने कहा था, सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू नहीं होने देंगे 

अदालत ने कहा कि  इन सभी मकसदों के लिए हमें नहीं लगता है कि आवेदक की सहायता की आवश्यकता होगी। तदनुसार अवमानना कार्यवाही बंद की जाती है और अवमानना नोटिस को खारिज किया जाता है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने बयान दिए थे कि वे एसवाईएल मामले में सर्वोच्च अदालत के फैसले को लागू नहीं होने देंगे। इससे पहले केंद्र ने मंगलवार को सर्वोच्च अदालत में कहा था कि पंजाब सरकार दशकों पुराने एसवाईएल नहर विवाद को सुलझाने में सहयोग नहीं कर रही है।

शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि पानी एक प्राकृतिक संसाधन है और जीवित प्राणियों को इसे साझा करना सीखना चाहिए। उसने कहा कि पक्षकारों को व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उसने परियोजना को लेकर हिंसा की कभी-कभी होने वाली घटनाओं का स्पष्ट जिक्र करते हुए कहा कि सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर पक्षकारों को बातचीत करके समाधान निकालने के प्रभाव और जरूरत को समझना होगा। पंजाब के वकील ने पीठ से कहा कि राज्य सरकार इस मसले को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने की इच्छुक है।

केंद्र की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुनवाई की शुरुआत में पीठ से कहा कि शीर्ष अदालत ने 2017 में कहा था कि इस मसले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए और भारत संघ, जल संसाधन मंत्रालय के माध्यम से, सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के उद्देश्य से हरियाणा और पंजाब राज्यों को एक साथ लाने का प्रयास कर रहा है। वेणुगोपाल ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि पंजाब सहयोग नहीं कर रहा। 2020 और 2021 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र भेजे गए थे, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।

 

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