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एनआईए टीम
– फोटो : social media
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टेरर फंडिंग के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने हिजबुल आतंकी समेत चार लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में बुधवार को चार्जशीट पेश की है। इनमें पाकिस्तान का रहने वाला हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी मुश्ताक अहमद मीर, जमात- ए- इस्लामिया का मुखिया अब्दुल हमीद गेनेई भी शामिल हैं।
चार्जशीट के अनुसार, पिछले साल एनआईए ने अल हुदा एजुकेशनल ट्रस्ट के खिलाफ टेरर फंडिंग का केस दर्ज किया था। जांच में पता चला कि ट्रस्ट को 2019 में अवैध घोषित जा चुका है। बावजूद जमात ने ट्रस्ट को सक्रिय कर फंडिंग को जारी रखा।
चार्जशीट में जिन चार लोगों का नाम हैं, उनमें मोहम्मद आमिर शमसी भी शामिल है। शमसी ही ट्रस्ट के रोजमर्रा के काम देखता था। यह काम जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियां चलाने से जुड़े हुए थे।
वह शिक्षा और धर्म के नाम पर चंदा जुटाता था और यह पैसा जमात के मुखिया गेनेई को दे देता था। पाकिस्तान से मुश्ताक अहमद मीर हवाला के जरिए शमसी को फंड भेजता था। मीर इस समय पाकिस्तान में रहता है, लेकिन मूल रूप से राजोरी जिले का रहने वाला है।
2019 में जमात को किया गया था प्रतिबंधित
फरवरी 2019 में केंद्र सरकार ने जमात ए इस्लामिया संगठन को देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त और आतंकियों के साथ मिलकर गतिविधियां चलाने पर पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। सरकार को आशंका थी कि यह संगठन अलगाववादी मूवमेंट चला सकता है।
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