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– फोटो : सोशल मीडिया
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मणिपुर में जातीय झड़पों को पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता ने ‘राजनीतिक समस्या’ करार दिया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि जब तक सुरक्षा बलों से लूटे गए करीब चार हजार हथियार आम लोगों से बरामद नहीं हो जाते, तब तक हिंसा की घटनाएं जारी रहेंगी।
पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने यह भी कहा कि भारत मिजोरम और मणिपुर में आम ग्रामीणों, सेना या पुलिस सहित म्यांमार से शरण चाहने वाले किसी भी व्यक्ति को शरण दे रहा है, लेकिन उग्रवादी समूहों या मादक पदार्थों के तस्करों के सशस्त्र कैडरों को नहीं।
हिंसा रोकने में हम काफी हद तक रहे सफल
उन्होंने कहा, जहां तक जमीनी स्थिति का सवाल है, भारतीय सेना का उद्देश्य शुरू में अपने घरों से विस्थापित हुए लोगों के लिए बचाव और राहत अभियान चलाना था।कलिता ने कहा, ‘इसके बाद, हम हिंसा को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें हम काफी हद तक सफल रहे हैं। लेकिन दो समुदायों, मेइतेई और कुकी के बीच ध्रुवीकरण के कारण, यहां और वहां कुछ छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं।’
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