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Madhya Pradesh
– फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt
विस्तार
लोकसभा चुनाव को लेकर उल्टी गिनती शुरू हो गई है। मार्च के पहले सप्ताह में चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है और आचार संहिता का एलान हो सकता है। इसे देखते हुए भाजपा-कांग्रेस ने रणनीति बनाना शुरू कर दी है। मध्यप्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं और भाजपा व कांग्रेस दोनों ही पार्टियों की कोशिश है कि फरवरी के आखिरी सप्ताह तक मध्यप्रदेश की 29 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया जाए।
जिस तरह की रणनीति भाजपा और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए अपनाई थी, ठीक वैसी ही रणनीति लोकसभा चुनाव के लिए भी दोनों ही पार्टियां अपना सकती हैं। भाजपा के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि तीन बार से अधिक समय तक टिकट पा रहे नेताओं का इस बार पत्ता कट सकता है। भाजपा की कोशिश है कि इस बार कुछ नए चेहरों को प्रमोट करके लोकसभा का टिकट दिया जाए। प्रहलाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, रीति पाठक, राकेश सिंह, राव उदय प्रताप सिंह को विधानसभा चुनाव लड़ाकर, जिताकर और मंत्री बनाकर भाजपा ने मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय कर दिया है। तोमर को मध्यप्रदेश विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया है। जबकि फग्गन सिंह कुलस्ते और गणेश सिंह विधानसभा का चुनाव हार चुके हैं, तो ऐसे में इस बात की संभावना काफी कम है कि भाजपा उन्हें दोबारा मौका देगी।
पार्टी के सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश की ऐसी सात सीटें ऐसी चिन्हित की गई हैं, जहां पर भाजपा के सांसदों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर माना गया है। ये सीटें हैं भोपाल, सागर, रीवा, ग्वालियर, खरगोन, उज्जैन, राजगढ़। वहीं छिंदवाड़ा, मुरैना, भिंड, मंडला जैसी सीटों पर भाजपा को विधानसभा चुनाव में उतनी अधिक सफलता नहीं मिली, जितनी पार्टी ने उम्मीद की थी। इन सीटों पर भाजपा इस बार नए चेहरों को मौका देने पर विचार कर रही है। वहीं ऐसे सांसद जो लगातार तीन बार से चुने जा रहे हैं, उन्हें भी भाजपा इस बार साइडलाइन कर सकती है। इसे लेकर भाजपा के अंदर मंथन भी जारी है। भाजपा की पूरी कोशिश मध्यप्रदेश में नई लीडरशिप तैयार करने की है।
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