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Khabaron ke Khiladi
– फोटो : अमर उजाला
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इस हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस फैसले का असर राजनीतिक पार्टियों पर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड पर रोक लागने का आदेश दे दिया। लोकसभा चुनाव से ऐन पहले चुनावी चंदे की इस व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बता दिया है। आखिर यह व्यवस्था क्यों बनी? अब जो सवाल खड़े हो रहे हैं वो पहले क्यों नहीं उठे? चुनावी साल में इसका क्या असर होगा? इन सवालों पर इस हफ्ते के खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, अवधेश कुमार, प्रेम कुमार, राकेश शुक्ला मौजूद रहे।
क्या इस मामले में सभी राजनीतिक दल जिम्मेदार हैं?
प्रेम कुमार: अगर राजनीतिक दलों ने इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा लिया है तो सब बराबर के भागीदार हैं। भले किसी को कम चंदा मिला हो या किसी को ज्यादा चंदा मिला हो। अगर आप इसके खिलाफ थे तो आपने इस तरीके से चंदा लेने से मना कर दिया होता, लेकिन किसी ने ऐसा नहीं किया। इसलिए मैं इसमें सभी पार्टियों को भागीदार मानता हूं। बीते पांच-छह साल में इलेक्टोरल बॉन्ड के कारण कुछ पार्टियों को नुकसान हुआ तो कुछ को काफी फायदा हुआ। वो सत्ताधारी दल, जिनके पास कुछ देने की ताकत होती है, उन्हें इसका फायदा ज्यादा हुआ।
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